बुरा लगता है , जब भाई भाई में  भेदभाव किया  जाता है
बुरा लगता है , जब चढ़ा का काम निकलवाया जाता है ,
बुरा लगता है , कहा जाता है तेरे पास सब कुछ है लेकिन तेरी नियत नहीं है।
बुरा लगता है , वो तो छोटा है ,तू समझ सबसे बड़ा तू है
बुरा लगता है , हर बात के लिए दोषी ठहराया जाता है
बुरा लगता है , घर में इतने होते हुई ये कहा जाता है तू समझदार है तू नहीं करेगा तो कौन करेगा।
बुरा लगता है , मेने तो इतना कर दिया लेकिन तुमने तो अब तक घर में एक ईंट भी नहीं लगाई
बुरा लगता है , जब सबके सामने बेइज्जत किया जाता है।
बुरा लगता है , प्रेम से कमरे में बुलाकर बेइज्जत किया जाता है
बुरा लगता है , जब बॉस मेरे द्वारा किये गए काम का श्रेय खुद ले लेता है
बुरा लगता है , केवल के स्वार्थ के लिए रिश्ते रखना
बुरा लगता है , जब प्यार की कोई कीमत नहीं समझता है
बुरा लगता है , जब कोई पति अपनी पत्नी की कदर ना करें
बुरा लगता है , बुरा लगता है जब कोई पत्नी अपने पति की कदर न करे
बुरा लगता है , 
बुरा लगता है
बुरा लगता है
बुरा लगता है
बुरा लगता है














उम्म्म... आहा! आचार खाते ही मजा आ गया
मुंह में पानी लाए लोहार्गल की कैरी का आचार
राजस्थान का लोहार्गल अपने पौराणिक महत्त्व के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसे श्कहवती का हरिद्वार भी कहा जाता है लेकिन  इसके साथ ही लोहार्गल की कैरी(अमिया) का आचार भी अपने अनूठे स्वाद के लिए प्र्रख्यात है। शेखावाटी के साथ ही पूरे भारत में लोहार्गल की कैरी का आचार बड़े चाव से खाया जाता है। यूं तो पूरे भारत के कई  राज्योंं में कैरी की पैदावार होती है, लेकिन लोहार्गल की कैरी को इसके विशिष्ट स्वाद और खटाई के लिए जाना जाता है। रही आम की बात तो इतना स्वादिष्ट की कहने ही क्या  लोहार्गल की तन में स्थित गुर्जरों की ढाणी व लोहरड़ा के अलावा चिराना और किरोड़ी की कैरी में यही विशेषता पाई जाती है। चिराना और किरोड़ी की कैरी का आचार भी लोहार्गल की कैरी के बराबर स्वादिष्ट माना जाता है। लोहार्गल की कैरी का आचार पड़ोसी राज्य हरियाणा, उत्तरप्र्रदेश मेें भी खासा पसंद किया जाता है। यहां के आचार की कीर्ति मुंबई, कोलकाता, सूरत, बैंगलौर, गुवाहाटी सहित उन सभी जगहों पर फैली हुई हैे, जहां इस क्षेत्र से जुड़े लोग लोग निवास कर रहेे हैं। तीर्र्थराज लोहार्गल सहित आसपास के क्षेत्र में आचार का उत्पादन अब लोगों के लिए एक लघु उद्योग के रूप मेें भी फायदेमंंद साबित हो रहा है। हमने इसको लेकर के एक स्टोरी बनाने की सोची और हमने खुद जाकर व्वाहन के दूकानदार और बागवान है उनसे बात की क्यों है ये केरी का अचार स्वादिष्ट


...तो इसलिए स्वादिष्ट है लोहार्गल की कैरी का आचार बॉक्स
तीर्थराज लोहार्गल की कैरी का आचार अपने विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इसकेे पीछे बड़ी वजह है कि यहां की कैैरी मेें विशेषता पाई जाती हैै कैरी की जाली और खटास में। लोहार्गल की कैरी की जाली काफी रेशेदार होती है जिस वजह से आचार का मसाला अंदर तक रम जाता है। और जब मसाला केरी के अंदर राम जाट अहइ तो उसका स्वाद दोगुना हो जाता है रमता है तब इस वजह से आचार के स्वाद में काफी जबर्दस्त खटास रहती है। आम तौर पर आचार किसी भी सूरत मेें एक या दो महीनेे सेे ज्यादा नहीं चल पाता है और फफूंद आने पर खराब हो जाता है। लेकिन लोहार्गल क्षेत्र की कैरी का आचार 8-10महीने तक रखा रहने के बावजूद खराब नहीं होता है। जाली के रेशों में मसाला और तेल पर्याप्त मात्रा में होनेे की वजह से आचार जल्दी खराब नहीं होता है।

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