
खबर - अनिल मिंतर
नवलगढ़ - चाइनीज मांझा कितना खतरनाक है इसकी जानकारी होते ही नवलगढ़ युवाओं ने इससे तोबा करने की ठान ली है। पहले के समय में नवलगढ़ और सम्पूर्ण शेखावाटी में पतंग जब उड़ाए जाते थे उस समय पेच देखने लायक होते थे। पतंग आसमान में आगे से आगे बढ़ती रहती थी और पेच देखते लोग बस ये देखते थे की कौन बाजी मारेंगे। सुना है देखा नहीं लेकिन बढे बूढ़े लोग कहते की अगुणा दरवाज़ा पर स्वर्गीय केशरदेव मिंतर , श्री राम बासोतिया , नहर सिंह शेखावत , बजरंग लाल दादा ,सीताराम जी सहल , राधेश्याम सेठ ,पूर्ण जी पानवाला ,बाबूलाल शर्मा ( ढोला), ओमप्रकाश प्रेसिडेंट , सुशिल बॉस , रमेश सुंदरिया सहित कई लोग ऐसे थे और है जब इनकी पतंग उड़ती थी तो लोगों में शर्ते लगती थी। और इन लोगो की पतंग और डोर बाजार से नहीं आती थी बल्कि न्यारिया पतंग बनाते थे और नयारिया ही डोर सूतते थे। और नवलगढ़ के वासी भी बाजार से सूत लेकर आते थे और डोर को सूतते थे। जब से बाजार में मांझा
आया तब से इस परम्परा को लोग भूल से गए। और सस्ते और खतरनाक चाइनीज मांझे ने समाप्त सा ही कर दिया। लेकिन नवलगढ़ के युवा अब इस और वापस लौटने लगे है। मस्ती ग्रुप के विनय पोदार ने बताया की हम युवाओं ने ये सोचा है की चाइनीज मांझे जैसी खतरनाक वस्तुओ से बचने के लिए हमें अपनी पुरानी परम्परा की और वापस मुड़ना चाहिए। जिससे हम सभी सुरक्षित भी रहेंगे और हमारा पैसा बाहर भी नहीं जायेगा। मस्ती ग्रुप ने आज डोर सूत कर इसका श्री गणेश कर दिया। पोदार ने बताया की जब हम डोर सूत रहे थे तब हमारे बच्चे भी आश्चर्य में पड़ गए की ये हो क्या रहा है एक व्यक्ति आगे चल रहा है और तीन उसके पीछे। हमने उनको बताया की हम लोग डोर के लिए इतनी मेहनत करते थे। गौतम खंडेलवाल, निहाल जांगिड़ , संजू , राकेश ,मुकेश सोनी नीरज डंगायच , नरेश सोलंकी ,गौतम डंगायच , विक्की डिडवानिया ,एवम सारंग पारीक सहित सभी लोगो ने इस परंपरा को वापस शुरू करने का सभी से आह्वाहन किया 