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सीआरपीएफ कैंप में साथी की फायरिंग में बलौदा के जवान की हुई मौत

खबर - पवन शर्मा
आज गांव में सैनिक सम्मान के साथ होगा मृतक एएसआई राजवीर का अंतिम संस्कार 
सूरजगढ़। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के बासागुड़ा क्षेत्र में सीआरपीएफ कैंप में शनिवार को हुई फायरिंग में क्षेत्र के बलौदा गांव निवासी एक जवान की भी मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक सूरजगढ़ थाना क्षेत्र के बलौदा गांव का राजवीर सिंह मेघवाल सीआरपीएफ में एएसआई के पद पर बासागुड़ा क्षेत्र में तैनात था। शनिवार शाम को साथी जवान यूपी के संतकुमार ने राजवीर सहित पांच जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें चार की मौत हो गई वहीं एक जवान घायल हो गया। मृतक जवानों में बलौदा गांव का राजवीरसिंह मेघवाल भी शामिल था। सरपंच प्रतिनिधि नरेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया की सीआरपीएफ हेडक्वाटर से शनिवार देर रात्री उन्हें घटना की जानकारी मिली थी। की साथी जवान द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग में उनके गांव के राजवीर की भी मौत हुई है। नरेश कुमार ने बताया की गांव के राजवीर की मौत की सुचना के बाद पुरे गांव में शौक का माहौल हो गया है। घटना की जानकारी मृतक की पत्नी व बच्चो को नहीं दी गई है वही अन्य परिजनों को मामले की जानकारी है। सरपंच प्रतिनिधि ने बताया की मृतक का शव सोमवार सुबह गांव पहुंचेगा जहां पुरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जायेगा। 

सोमवार को खुद को आना था लेकिन पहुंचेगा शव 
इसे नियति की क्रूरता कहे तो गलत नहीं होगा की जिस शख्स को सोमवार को खुद घर आना था अब उसका शव तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचेगा। मृतक के भतीजे शुशील कुमार ने बताया की उनकी अपने चाचा से शनिवार दोपहर को ही बात हुई थी उन्होंने कहा था कि उनका ट्रांसफर गुरुग्राम हो गया है। शुशील ने बताया की चाचा ने कहा था की वह सोमवार को गांव आएंगे जिसके बाद वह अपनी ड्यूटी गुरुग्राम में ज्वाइन करेंगे। लेकिन होनी को शायद ये मंजूर नहीं था  तभी तो हंसी ख़ुशी गांव आने वाला व्यक्ति अब तिंरगे में लिपटकर गांव आएगा। 

ड्यूटी को लेकर था विवाद 
बताया जा रहा है कि फायरिंग करने वाले संतकुमार का एक अन्य जवान गजानंद के साथ ड्यूटी को लेकर विवाद चल रहा था। शनिवार सुबह भी दोनों में इस बाबत झगड़ा हुआ था। इस झगड़े में गजानंद की पैरवी राजवीर सिंह सहित अन्य जवान ले रहे थे। कल दोपहर को खाना खाने के बाद जब पांचों जवान सो रहे थे तो संतकुमार ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जिससे चार जवानों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया वहीं गजानंद घायल हो गया। मृतकों में तीन तो फायरिंग करने वाले गजानंद से सीनियर थे। घटना की सुचना पर सीआरपीएफ के अन्य जवानों ने संतकुमार को पकड़कर अधिकारियों के हवाले कर दिया। जिसके बाद सेना ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। 

30 वर्ष पूर्व हुआ था सेना में भर्ती 
हादसे का शिकार हुए एएसआई राजवीर सिंह काफी मिलनसार व हंसमुख व्यक्ति थे। गांव में वे जब भी आते थे तो सभी के साथ काफी हंसी मजाक करते थे। राजवीरसिंह 1988 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनके दो पुत्र व एक पुत्री है जो अभी अध्यनरत है। उसका बड़ा भाई उम्मेदसिंह भी सीआरपीएफ में तैनात है।