खबर - जयंत खांखरा
खेतङी -12 दिसंबर का वह ऐतिहासिक दिन जब शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में पूरे विश्व को हिंदू धर्म की गहराइयों के बारे में बता कर हिंदू धर्म का परचम स्थापित कर- कर अपने प्रिय मित्र खेतड़ी के राजा अजीत सिंह जिन्होंने स्वामी विविदिशानंदको खेतड़ी में स्वामी विवेकानंद नामकरण करके उनको शिकागो धर्म सम्मेलन में भेजने का पूरा प्रबंध खेतड़ी रियासत के द्वारा किया गया था उनकी रियासत जिसको महारानी विक्टोरिया सम्राज्य ने प्रिंसली वेल्स स्टेट का दर्जा दिया मेंपधारे थे।शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने सर्वप्रथम विश्व के लोगों को भाइयों और बहनों कहकर संबोधित किया तो जिस पर अमेरिका की जनता स्तब्ध रह गई और काफी देर तकखड़े होकर तालियों की करतल ध्वनि लोगों ने बजाकर स्वामी विवेकानंद का अभिवादन किया और उसके बाद जो स्वामी विवेकानंद ने सनातन धर्म के बारे में विश्व को बताया तो हिंदू धर्म की गहराइयों के बारे में पूरे विश्व ने जाना, वसुदेव कुटुंबकम की भावना क्या है यह पूरे विश्व को स्वामी विवेकानंद ने बताया। 12 दिसंबर 1893 को जब स्वामी विवेकानंद पूरे विश्व में सनातन धर्म का परचम लहरा कर खेतड़ी आए तो खेतड़ी के राजा अजीत सिंह नेबबाईसेअपनी आठ घोड़ों की की बग्गी में बैठाकरस्वामी विवेकानंद कोलेकर आए। जिस प्रकार श्री राम जबलंका विजय करके अयोध्या लौटे थे तो उनका अयोध्या वासियों ने भव्य स्वागत किया गया था उसी प्रकार राजा अजीत सिंह और खेतड़ी वासियों ने स्वामी विवेकानंद का भव्य स्वागत किया और पूरे खेतड़ी कस्बे को उस समय 40 मंणघी के दीयों से सजाया गया और खेतड़ी में पन्ना सागर तलाब पर खेतड़ी वासियों के लिए सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया था उस समय पूरी खेतङी की जनता ने दीपावली की तरह यह उत्सव मनाया।इस ऐतिहासिक दिन को रामकृष्ण मिशन के सचिव आत्मनिष्ठानंद महाराज के अथक प्रयासों के द्वारा विरासत दिवस के रुप में मनाया जाता है जिससे यह यादें चिरस्थाई हो जाए जिस तरह 12 दिसंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद को बग्गी में बैठाकर राजा अजीत सिंह खेतड़ी लाए थे उसी घटना को एक बारफिर स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह के चरित्रों द्वारा पुनर्जीवित कर साक्षात वर्णन किया जाता है।खेतड़ी की जनता को अपनी ऐतिहासिक विरासत के बारे में जागरूक भी किया जाता है तथा इस दिवस का नाम विरासत दिवस रखा गया है।मिशन के सचिव आत्मनिष्ठानंद महाराज तथा कार्यक्रम के संयोजक अशोक सिंह शेखावत ने बताया कि सुबह 8:00 बजे से विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं द्वारा पूरे कस्बे में प्रभात फेरी निकाली जाएगी। स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह की दोपहर बाद झांकी निकाली जाएगी सायकाल 4:00 बजे राजा अजीत सिंह द्वारा स्वामी विवेकानंद का सम्मान किया जाएगा तथा जीवंत झांकियां निकाली जाएगी। शाम 5:00 बजे पन्ना सागर तालाब पर स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह का नागरिक अभिनंदन तथा 6:00 बजे राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जयपुर के सौजन्य से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
खेतङी -12 दिसंबर का वह ऐतिहासिक दिन जब शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में पूरे विश्व को हिंदू धर्म की गहराइयों के बारे में बता कर हिंदू धर्म का परचम स्थापित कर- कर अपने प्रिय मित्र खेतड़ी के राजा अजीत सिंह जिन्होंने स्वामी विविदिशानंदको खेतड़ी में स्वामी विवेकानंद नामकरण करके उनको शिकागो धर्म सम्मेलन में भेजने का पूरा प्रबंध खेतड़ी रियासत के द्वारा किया गया था उनकी रियासत जिसको महारानी विक्टोरिया सम्राज्य ने प्रिंसली वेल्स स्टेट का दर्जा दिया मेंपधारे थे।शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने सर्वप्रथम विश्व के लोगों को भाइयों और बहनों कहकर संबोधित किया तो जिस पर अमेरिका की जनता स्तब्ध रह गई और काफी देर तकखड़े होकर तालियों की करतल ध्वनि लोगों ने बजाकर स्वामी विवेकानंद का अभिवादन किया और उसके बाद जो स्वामी विवेकानंद ने सनातन धर्म के बारे में विश्व को बताया तो हिंदू धर्म की गहराइयों के बारे में पूरे विश्व ने जाना, वसुदेव कुटुंबकम की भावना क्या है यह पूरे विश्व को स्वामी विवेकानंद ने बताया। 12 दिसंबर 1893 को जब स्वामी विवेकानंद पूरे विश्व में सनातन धर्म का परचम लहरा कर खेतड़ी आए तो खेतड़ी के राजा अजीत सिंह नेबबाईसेअपनी आठ घोड़ों की की बग्गी में बैठाकरस्वामी विवेकानंद कोलेकर आए। जिस प्रकार श्री राम जबलंका विजय करके अयोध्या लौटे थे तो उनका अयोध्या वासियों ने भव्य स्वागत किया गया था उसी प्रकार राजा अजीत सिंह और खेतड़ी वासियों ने स्वामी विवेकानंद का भव्य स्वागत किया और पूरे खेतड़ी कस्बे को उस समय 40 मंणघी के दीयों से सजाया गया और खेतड़ी में पन्ना सागर तलाब पर खेतड़ी वासियों के लिए सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया था उस समय पूरी खेतङी की जनता ने दीपावली की तरह यह उत्सव मनाया।इस ऐतिहासिक दिन को रामकृष्ण मिशन के सचिव आत्मनिष्ठानंद महाराज के अथक प्रयासों के द्वारा विरासत दिवस के रुप में मनाया जाता है जिससे यह यादें चिरस्थाई हो जाए जिस तरह 12 दिसंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद को बग्गी में बैठाकर राजा अजीत सिंह खेतड़ी लाए थे उसी घटना को एक बारफिर स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह के चरित्रों द्वारा पुनर्जीवित कर साक्षात वर्णन किया जाता है।खेतड़ी की जनता को अपनी ऐतिहासिक विरासत के बारे में जागरूक भी किया जाता है तथा इस दिवस का नाम विरासत दिवस रखा गया है।मिशन के सचिव आत्मनिष्ठानंद महाराज तथा कार्यक्रम के संयोजक अशोक सिंह शेखावत ने बताया कि सुबह 8:00 बजे से विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं द्वारा पूरे कस्बे में प्रभात फेरी निकाली जाएगी। स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह की दोपहर बाद झांकी निकाली जाएगी सायकाल 4:00 बजे राजा अजीत सिंह द्वारा स्वामी विवेकानंद का सम्मान किया जाएगा तथा जीवंत झांकियां निकाली जाएगी। शाम 5:00 बजे पन्ना सागर तालाब पर स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह का नागरिक अभिनंदन तथा 6:00 बजे राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जयपुर के सौजन्य से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
