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10 साल से बेडियों में जकडी विवाहिता की जिंदगी

खबर - हर्ष स्वामी
पशुओं के साथ बेल से बांधकर रखते विवाहिता
रूपयो के अभाव में नही करवा पा रहे ईलाज
बीपीएल व भामासाह कार्ड भी नही पीडित परिवार के पास
मानसिक संतुलन बिगडने पर ससुराल वालो ने छोडा विवाहिता को
बेवा मां के लिए पालनपोषण करना भी हो रहा मुश्किल
कोठी की ढाणी तन नंगलीसलेदी सिंह गांव का मामला
खेतडी। एक मां पर क्या गुजरती होगी जो अपनी बेटी को ही पिछले दस साल से अपने हाथो से मजबुर होकर जंजीरो से बांधना पड रहा है। ससुराल वालो ने मानसिक रोगी कहने के बाद विवाहिता बेटी को पीहर में छोड दिया, शुरूआत में तो बेवा मां ने ईलाज करवाने की कोशिश की, लेकिन गरीबी की वजह से ईलाज नही करवा पाई। मजबुर होकर जंजीरो में बांधना ही उसको एक मात्र उपया बचा था। प्रशासन के सामने भी सहायता के लिए गिड-गिडाई, लेकिन कही से सहायता नही मिली। न तो भामासाह कार्ड बना और न ही बीपीएल में नाम दर्ज हुआ। और मानसिक पीडिता को समाजिक पेंशन भी दी जा रही है। इस परिवार के लिए राम और राज दोनो ही रूठ गये है। 10 साल से जंजीरो में जिंदगी गुजार रही विवाहिता। खेतडी उपखण्ड के नंगली सलेदी सिंह पंचायत का एक छोटा सा गांव कोठी की ढाणी में एक विवाहिता पिछले दस सालो से जंजीरो की बेडियों में जिंदगी गुजार रही है। विवाहिता गुलाब का मानसिक संतुलन बिगडने के पश्चात मजबुर घरवाले विवाहिता को एक पेड के जंजीर से बांधकर छोड रखा है।

पंचायत से नही मिल रही कोई सहायता
पीडिता को पेड से बांधने की खबर ग्राम पंचायत को काफी समय से मालुम है। लेकिन उनके द्वारा भी 10 सालो के समय अवधि में किसी भी प्रकार की सहायता नही की गई। पंचायत के ग्रामसेवक बलवंत कुमार व सरपंच दीपिका कंवर का कहना है कि इनके पास मेडिकल कागजात नही होने की वजह से समाजिक पेंशन नही दी जा रही है। चलो हम मान लेते है किपीडिता के पास कागजात नही है लेकिन अधिकारीयो ने तो आंखो देखी घटना पर ही पट्टी बांधकर बैठे हुए है।  पीडिता का पंचायत ने अभी तक भामासाह कार्ड नही बनवाया है और न ही बीपीएल में नाम जोडा गया है। इन दोनो सुविधाओ में किसी जरूरी कागज नही चाहिए लेकिन फिर भी पंचायत भविष्य में सहायता दिलावने की बात कहकर अपने आप से पल्ला झाड रहे है। घर का खर्च का बेवा मॉ शांती देवी वृद्धावस्था पेंशन में मिलने वाले सात सौ रूपयो से ही चल रहा है।

11 वर्षीय लडकी देखभाल के लिए पढाई छोडने पर मजबुर
पीडिता की एक 11 वर्षीय लडकी मोनिका की पढाई भी छोडने पर मजबुर हो रही है। मोनिका का समय बिमार मॉ गुलाब देवी की देखभाल करने में गुजर जाता है हालांकि मोनिका नंगली सलेदीसिंह पंचायत की निमला जौहडी की राजकीय स्कुल की तीसरी कक्षा की छात्रा है। अध्यापक रघुवीर सिंह ने बताया कि मोनिका महिने में बहुत कम ही स्कुल में आती है। यह अपनी मॉ के पालनपोषण में लगी रहती है।

अगर पीडिता को अभी भी समुचित ईलाज मिले तो हो सकती है स्वस्थ।
इन दस सालो में उसको किसी भी बडे अस्पताल में नही दिखाया गया। अगर प्रशासन व चिकित्सा विभाग अपने स्तर पर उसका ईलाज करवाये तो ईलाज होना सम्भव है। खेतडी तहसीलदार जयसिंह के समक्ष मामला पहुचा तो उन्होने आश्वासन दिया की इसका ईलाज करवाया जायेगा और बीसीएमओं को मौका स्थल पर जाकर जांच करने की बात कही। और परिवार का बीपीएल व भामासाह कार्ड जल्द ही बनवाने का आश्वासन दिया। समाचार लिखे जाने तक बीसीएमओं डॉ छोटेलाल गुर्जर मौके पर डॉक्टरो की टीम के साथ पहुचे।




बेवा मॉ शांती का कहना है कि गुलाब देवी पागल होने के बाद इसको अगर खुला छोड दिया जाये तो यह भाग कर पहाड पर चढ जाती है और वापस नही आती। जिससे हमको मजबुर होकर इसको बेल से बांधना पड रहा है। गुलाब देवी की 11 साल पहले की जिंदगी खुशी-खुशी से गुजर रही थी पीडिता विवाहिता के मां बाप ने उसकी शादी सांखडा की ढाणी तन पपुरना में की थी शादी के एक साल बाद विवाहिता ने एक बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद ही विवाहिता में पागलपन के दौरे आने शुरू हो गये। ससुराल वालो ने पागल घोषित कर विवाहिता को पीहर कोठी की ढाणी में लाकर छोड दिया। शुरूआत में तो पीडिता की मॉ ने खेतडी, चिडावा और जिला मुख्यालय झुंझुनूं के अस्पतालो में ईलाज के लिए दर-दर भटकती रही। लेकिन गरीबी की वजह से बडे अस्पतालो में ईलाज नही करवा पाई और थक हारकर करीब दो साल ठीक करवाने की मेहनत के बाद जंजीरो में बांध दिया है। इस कडाके की ठंड में भी बाहर पेड़ के निचे पशुओं के साथ बंधी हुई है।