खबर - हर्ष स्वामी
गरीबी की वजह से नही हो पा रहा था ईलाज,
बीसीएमओ डाक्टरो की टीम लेकर पहुचे पीडिता के घर,
झुंझुनूं अस्पताल में करवाया भर्ती,
खेतडी। 10 साल से जंजीरो में जकडी विवाहिता को चिकित्सा विभाग ने अस्पताल में करवाया भर्ती। मामले के अनुसार खेतडी उपखण्ड के नंगली सलेदी सिंह पंचायत का एक छोटा सा गांव कोठी की ढाणी में एक विवाहिता पिछले दस सालो से जंजीरो की बेडियों में जिंदगी गुजार रही थी। विवाहिता गुलाब का मानसिक संतुलन बिगडने के पश्चात मजबुर घरवाले विवाहिता को एक पेड के जंजीर से बांधकर छोड रखा था। डिलीवरी के समय नवजात की मौत होने के बाद ही विवाहिता में पागलपन के दौरे आने शुरू हो गये। ससुराल वालो ने पागल घोषित कर विवाहिता को पीहर कोठी की ढाणी में लाकर छोड दिया। शुरूआत में तो पीडिता की मॉ ने खेतडी, चिडावा और जिला मुख्यालय झुंझुनूं के अस्पतालो में ईलाज के लिए दर-दर भटकती रही। लेकिन गरीबी की वजह से बडे अस्पतालो में ईलाज नही करवा पाई और थक हारकर करीब दो साल ठीक करवाने की मेहनत के बाद जंजीरो में बांध दिया था। इस कडाके की ठंड में भी बाहर पेड़ के निचे पशुओं के साथ बंधी रहती थी। इस पुरे मामले की जानकारी जब चिकित्सा विभाग को लगी तो तुरन्त हरकत में आया और बीसीएमओं डॉ छोटेलाल गुर्जर ने डॉक्टर नितेश, कम्पाउंडर पवन व सुनिला के साथ विवाहिता को झुंझुनूं के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया।
परिवार वाले समझाइस के बाद अस्पताल में भर्ती करवाने पर हुए सहमत
परिवार के सदस्यों ने पीडिता को गरीबी की वजह से झुंझुनूं भेजने से मना कर दिया। और करीब बीसीएमओं की एक घण्टे की समझाइस के बाद परिवार को नकद रूपये देने पर पीडिता को भेजने के लिए सहमत हुए। परिजनो का कहना है कि हमारे पास रहने व खाने के लिए रूपये तक नही है अगर पीडिता को झुंझुनूं ले जाया गया तो वहां पर खाने की परेशानी हो जायेगी। बीसीएमओं डॉ छोटेलाल गुर्जर ने परिजनो की हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दिया।
गरीबी की वजह से नही हो पा रहा था ईलाज,
बीसीएमओ डाक्टरो की टीम लेकर पहुचे पीडिता के घर,
झुंझुनूं अस्पताल में करवाया भर्ती,
खेतडी। 10 साल से जंजीरो में जकडी विवाहिता को चिकित्सा विभाग ने अस्पताल में करवाया भर्ती। मामले के अनुसार खेतडी उपखण्ड के नंगली सलेदी सिंह पंचायत का एक छोटा सा गांव कोठी की ढाणी में एक विवाहिता पिछले दस सालो से जंजीरो की बेडियों में जिंदगी गुजार रही थी। विवाहिता गुलाब का मानसिक संतुलन बिगडने के पश्चात मजबुर घरवाले विवाहिता को एक पेड के जंजीर से बांधकर छोड रखा था। डिलीवरी के समय नवजात की मौत होने के बाद ही विवाहिता में पागलपन के दौरे आने शुरू हो गये। ससुराल वालो ने पागल घोषित कर विवाहिता को पीहर कोठी की ढाणी में लाकर छोड दिया। शुरूआत में तो पीडिता की मॉ ने खेतडी, चिडावा और जिला मुख्यालय झुंझुनूं के अस्पतालो में ईलाज के लिए दर-दर भटकती रही। लेकिन गरीबी की वजह से बडे अस्पतालो में ईलाज नही करवा पाई और थक हारकर करीब दो साल ठीक करवाने की मेहनत के बाद जंजीरो में बांध दिया था। इस कडाके की ठंड में भी बाहर पेड़ के निचे पशुओं के साथ बंधी रहती थी। इस पुरे मामले की जानकारी जब चिकित्सा विभाग को लगी तो तुरन्त हरकत में आया और बीसीएमओं डॉ छोटेलाल गुर्जर ने डॉक्टर नितेश, कम्पाउंडर पवन व सुनिला के साथ विवाहिता को झुंझुनूं के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया।
परिवार वाले समझाइस के बाद अस्पताल में भर्ती करवाने पर हुए सहमत
परिवार के सदस्यों ने पीडिता को गरीबी की वजह से झुंझुनूं भेजने से मना कर दिया। और करीब बीसीएमओं की एक घण्टे की समझाइस के बाद परिवार को नकद रूपये देने पर पीडिता को भेजने के लिए सहमत हुए। परिजनो का कहना है कि हमारे पास रहने व खाने के लिए रूपये तक नही है अगर पीडिता को झुंझुनूं ले जाया गया तो वहां पर खाने की परेशानी हो जायेगी। बीसीएमओं डॉ छोटेलाल गुर्जर ने परिजनो की हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दिया।
