नवलगढ़ - पतंगबाजी का मजा तभी आता है, जब आपस में उन्हें लड़ाया जाए और इन्हें लड़ानें में सबसे अहम मांझा होता है। ये वो डोर होती है जो सालों से पतंग काटने के काम आ रही है। लेकिन अब चाइनीज मांझे ने इसकी पहचान कम कर दी है। चाइनीज मांझा डोर से बने मांझे से मजबूत होने के साथ-साथ सस्ता भी है. यही वजह है की लोग इस मांझे को खरीदते हैं, लेकिन ये चाईनीज मांझा खतरनाक भी है. दरअसल ये मांझा प्लास्टिक से बना होता है. इसके साथ-साथ इस पर लोहे का बुरादा लगा होता, जो अगर किसी बिजली के तार पर लग जाए, तो करंट भी लग सकता है.
इस मांझे से होने वाले नुक्सान की जानकारी देने के लिए नवलगढ़ के कुछ पत्रकार जिसमे राजकुमार शर्मा दैनिक भास्कर , राकेश गुर्जर दैनिक उद्योग आसपास , अनिल मिंतर राजसमाचार व् व्यापारी अनिल शर्मा (ढोला) सोशल मिडिया पर एक मुहीम चला रहे है। जिसमे लोगो को इस मांझे से होने वाली दिक्कतों के बारे में बताया जा रहा है। जब इस बारे में राजसमाचार ने नवलगढ़ नगरमंडल अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा से बात की तो
मिश्रा ने बताया की इसके लिए प्रशासन की मदद लेंगे और लोगो को इसके लिए जागरूक करेंगे। दुकानदारो को भी इसके लिए अवेयर किया जायेगा
☠विशेष सुचना☠
चाइना प्लास्टिक डोर का बहिष्कार करने की मुहिम को आगे बढ़ाये।कुछ सावधानियां के साथ सलाह उनको ध्यान में अवश्य रखे।
🎈बाईक चलाते वक्त छोटे बच्चे को आगे ना बिठाये।
🎈तेज गति से बाइक न चलाये।
🎈गले में प्लास्टिक डोर आते ही तुरंत रुकना चाहिये।
🎈जो प्लास्टिक धागा बेचता है उसकी सुचना पुलिस/नगरपालिका/तहसील स्तर पर अवश्य दे।
🎈छोटे बच्चों के हाथ में प्लास्टिक डोर न दे।
🎈कोई भी जिव/जानवर प्लास्टिक डोर में फंस जाये तो उसे अपना कर्तव्य समझ कर अवश्य निकालने की कोशीश करनी चाहिये।
प्रशासन से भी अपील है कि खानापूर्ति न करके उचित कार्यवाही करे।एक छोटा सा प्रयास है जो आप सभी के सहयोग के बिना अधूरा है।
🎯एक बार बनने के बाद नहीं होता है नष्ट।
शीशे के चूरे व गोंद से चाइनीज मांझे को बनाया जाता है। यह पूरी तरह से रेजर जैसा काम करता है। जिससे वह एक बार बनने के बाद शीशे के कारण कभी नष्ट नहीं होता है। ऐसे में इसका विक्रय करने वालों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
🎯2009 से लगा है प्रतिबंध
वर्ष 2009 से भारत में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गुजरात में एक बार चाइनीज मांझे से एक हजार चिडिय़ां मर गई थीं। पेड़ों व खंभे में फंसे मंझे से चिडिय़ां घायल होकर मर गई हैं। जिसके बाद से गुजरात, पंजाब व चेन्नई में सबसे पहले बाद में राजस्थान सहित कई राज्यो में चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई गयी थी।
🎯यह सिर्फ पतंग के शौकीनों की सनक है
पतंगबाजों में प्रतिस्पर्धा के कारण कि कौन किसकी पतंग को सबसे ज्यादा काटता है। एक हजार मीटर चाइनीज मांझा 75 रुपये व इंडियन मांझा 70 रुपये में बिकता है। इसको बनाने के लिए शीशा को चूर करके धागे पर गोद के साथ चिपका देते है।
🎯ऐसे पहुंचाता है नुकसान
मांझा अगर किसी के शरीर को छू जाए तो कटना तय है। गर्दन में छू जाए तो गर्दन कटने के साथ-साथ जहर फैल जाता है। खून की सप्लाई वाली नस, हृदय से मस्तिष्क जाने वाली नस, श्वास की नली, खाने की नली भी कट जाती है। जिससे मौत भी हो सकती है। पतंग उड़ाते समय उंगली कटने पर हाथ पकने लगता है। यह इतना दुष्प्रभावी होता है कि अगर एक बार बन गया तो नष्ट नहीं होता है।
सहयोग की आशा में-
अनिल शर्मा (ढोला)
चुना चौक,
नवलगढ़।
चाइना प्लास्टिक डोर का बहिष्कार करने की मुहिम को आगे बढ़ाये।कुछ सावधानियां के साथ सलाह उनको ध्यान में अवश्य रखे।
🎈बाईक चलाते वक्त छोटे बच्चे को आगे ना बिठाये।
🎈तेज गति से बाइक न चलाये।
🎈गले में प्लास्टिक डोर आते ही तुरंत रुकना चाहिये।
🎈जो प्लास्टिक धागा बेचता है उसकी सुचना पुलिस/नगरपालिका/तहसील स्तर पर अवश्य दे।
🎈छोटे बच्चों के हाथ में प्लास्टिक डोर न दे।
🎈कोई भी जिव/जानवर प्लास्टिक डोर में फंस जाये तो उसे अपना कर्तव्य समझ कर अवश्य निकालने की कोशीश करनी चाहिये।
प्रशासन से भी अपील है कि खानापूर्ति न करके उचित कार्यवाही करे।एक छोटा सा प्रयास है जो आप सभी के सहयोग के बिना अधूरा है।
🎯एक बार बनने के बाद नहीं होता है नष्ट।
शीशे के चूरे व गोंद से चाइनीज मांझे को बनाया जाता है। यह पूरी तरह से रेजर जैसा काम करता है। जिससे वह एक बार बनने के बाद शीशे के कारण कभी नष्ट नहीं होता है। ऐसे में इसका विक्रय करने वालों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
🎯2009 से लगा है प्रतिबंध
वर्ष 2009 से भारत में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गुजरात में एक बार चाइनीज मांझे से एक हजार चिडिय़ां मर गई थीं। पेड़ों व खंभे में फंसे मंझे से चिडिय़ां घायल होकर मर गई हैं। जिसके बाद से गुजरात, पंजाब व चेन्नई में सबसे पहले बाद में राजस्थान सहित कई राज्यो में चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई गयी थी।
🎯यह सिर्फ पतंग के शौकीनों की सनक है
पतंगबाजों में प्रतिस्पर्धा के कारण कि कौन किसकी पतंग को सबसे ज्यादा काटता है। एक हजार मीटर चाइनीज मांझा 75 रुपये व इंडियन मांझा 70 रुपये में बिकता है। इसको बनाने के लिए शीशा को चूर करके धागे पर गोद के साथ चिपका देते है।
🎯ऐसे पहुंचाता है नुकसान
मांझा अगर किसी के शरीर को छू जाए तो कटना तय है। गर्दन में छू जाए तो गर्दन कटने के साथ-साथ जहर फैल जाता है। खून की सप्लाई वाली नस, हृदय से मस्तिष्क जाने वाली नस, श्वास की नली, खाने की नली भी कट जाती है। जिससे मौत भी हो सकती है। पतंग उड़ाते समय उंगली कटने पर हाथ पकने लगता है। यह इतना दुष्प्रभावी होता है कि अगर एक बार बन गया तो नष्ट नहीं होता है।
सहयोग की आशा में-
अनिल शर्मा (ढोला)
चुना चौक,
नवलगढ़।
