खबर -अरुण मूंड
झुंझुनू-कुछ अच्छा होता है तब ख़ुशी होती है , लेकिन झुंझुनू में हमारी सरकार के कई दौरे प्रस्तावित हुए ,हर बार लोगो का दिल टूटा , हां इससे एक काम जरूर होता था की हमारे अधिकारी सजग हो जाते और ये देखते की सरकार किधर से आएगी रोड तो ठीक करवा दे। और कोई छोटी मोटी परेशानी हो वो भी ठीक हो जाये। लेकिन इस बार लग रहा है की सरकार आ सकती है हमारे जिले में जिस तरह से कार्यक्रम बना है कुछ आशा है लेकिन अभी भी लोग कह रहे है की "आजाये तब जाणियो" , के साचायी ही आव है के सरकार महारा जिला में. अभी भी अविश्वास है। कई सवाल है जो लोगो के मन में शायद कोई पूछ भी ले और नहीं पूछे तो जवाब की आशा तो रख ही सकते है ?
अंतिम साल में ही क्यों ?
या कोई आस नहीं है झुंझुनू से ?
कुछ तो मन में होगा ही हमारी सरकार के ?
कोई मंत्री नहीं प्रदेश झुंझुनू से ?
एक महिला सांसद को भी केंद्रीय मंत्री मंडल में नहीं लिया गया ?
किसान नाराज ?
देरवाला मामला और सरकार कोई जवाब नहीं दे रही ?
झुंझुनू की टूटी सड़के ? केवल झुंझुनू शहर ही क्यों पूरा जिला ?
स्वच्छता मिशन ?
बिजली बोर्ड का निजीकरण ?
मेडिकल कालेज झुंझुनू में क्यों नहीं ?
कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना में नवलगढ़ को क्यों नहीं लिया गया ?
किसानो का कई महीनो से धरना चल रहा है अभी तक कोई भी सरकार की तरफ से जवाब ?
घटता जल स्तर ?
पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा।
महिला रोगियों के लिए एक महिला अस्पताल की जरुरत , जयपुर बहुत दूर पड़ता है।
ये तो वो सवाल है जो मेरे दिमाग में आये लेकिन बहुत से सवाल है
पार्टी के कार्यकर्त्ता भी अपनी बात रहेंगे
