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"स्वर्गीय श्रीमती कृष्णा मिंतर — समाजसेवा और शिक्षा की प्रेरणास्त्रोत :- कृष्ण कुमार दायमा, गायत्री विद्यापीठ



साक्षरता अभियान से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित, महिला व बालिका शिक्षा में दिया अतुलनीय योगदान

नवलगढ़। स्वर्गीय श्रीमती कृष्ण मिंतर का जीवन समाज, शिक्षा और सेवा कार्यों के लिए हमेशा प्रेरणादायी रहेगा। वे न केवल एक आदर्श गृहणी थीं, बल्कि समाज की उन्नति और शिक्षा के प्रसार में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

श्रीमती कृष्णा मिंतर जी ने साक्षरता के क्षेत्र में शानदार कार्य किए, जिसके लिए उन्हें साक्षरता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया गया। महिला शिक्षा और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने में उनके कार्य अतुलनीय रहे। इसी कारण उन्हें जीवन भर कई सम्मानों और पुरस्कारों से नवाज़ा गया।

वे उपभोक्ता समिति की अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत रहीं और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा में सदैव सक्रिय रहीं। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद को उन्होंने सदैव अपना कर्तव्य माना और समाज में अपनी दयालु व ममतामयी छवि छोड़ी। वे सदा लोगों की सेवा करने में सजग रहती थी। उनके घर में सदैव गरीब और जरूरतमंद लोगों का आना जाना रहता था। 

दलित,शोषित,पिछड़े वर्ग के लोगों में शिक्षा की भावना भरना और उन्हें प्रेरणा देकर आगे बढ़ाना, उनकी समस्याओं को त्वरित गति से समाधान करवाना उनके जीवन का एक अभिन्न अंग था।

उनका पारिवारिक परिचय भी उच्च आदर्शों से जुड़ा है। वे स्वतंत्रता सैनानी स्वर्गीय केशर देव मिंतर की पुत्रवधू थी,तथा प्रसिद्ध एडवोकेट श्री ओमप्रकाश मिंतर की धर्मपत्नी। उनकी प्रेरणा से ही शिक्षा के कई मंदिर खुले। संस्कारों की जन्मभूमि गायत्री विद्यापीठ नवलगढ़ की भी उनकी ही प्रेरणा ओर सहयोग से स्थापना हुई।

आज भले ही श्रीमती कृष्ण मिंतर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियाँ और उनके किए गए कार्य हमेशा आने वाली पीढ़ियों को सच्ची सेवा और शिक्षा का मार्ग दिखाते रहेंगे।

आज उनकी पुण्य तिथि पर उनको भावपूर्ण श्रंद्धाजलि