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लाइनों से नहीं मिल रही फुर्सत, इसलिए कम हो रहे है आपसी झगड़े

खबर - अरुण मूंड
चोरियों की वारदातों में भी आई गिरावट, पुराने नोट चुराकर क्या करें
झुंझुनू। 
नोटबंदी ने लोगों को बैंकों और एटीएम की लाइनों में लगाया और उधर झुंझुनूं जिले में अपहरण, चोरी, मारपीट जैसी वारदातें 30 फीसदी कम हो गई। पुलिस का मानना है कि नोटबंदी ने आम आदमी सहित आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का ध्यान भी डायवर्ट किया है। चोरियां तो इसलिए भी कम हुई हैं कि 1000-500 के पुराने नोट अब चलन में नहीं होने से चोरों के भी किसी काम के नहीं रहे।  पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को रात आठ बजे घोषणा की कि रात 12 बजे बाद 1000-500 नोट अमान्य हो जाएंगे यानि प्रचलन से बाहर हो जाएंगे। पुराने नोट 30 दिसंबर तक अपने खातों में जमा करा सकेंगे। साथ ही पुराने नोट बदलवा भी सकेंगे। घोषणा के तत्काल बाद रात को ही कैश डिपोजिट पॉइंट पर पुराने नोट लेकर लोग एकत्रित होना शुरू हो गए। तब से आज तक बैंकों और एटीएम पर लंबी कतारें नजर रही हैं।  पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो नोटबंदी का सकारात्मक पहलू यह भी है कि सामान्य तौर पर होने वाले अपहरण, चोरी, आपसी झगड़े और मारपीट की वारदातों में करीब 30 फीसदी की कमी आई। एसपी सुरेंद्रकुमार गुप्ता ने बताया कि खेतड़ी, बगड़, पिलानी, चिड़ावा, उदयपुरवाटी, गुढ़ा जैसे थाना इलाकों में जहां आमतौर पर मारपीट आदि के काफी मामले दर्ज होते हैं, वहां नोटबंदी के बाद की 15 दिन की अवधि में इन मामलों में आश्चर्यजनक कमी आई है।  आंकड़ों पर गौर करें तो नोटबंदी से पहले 23 अक्टूबर से 8 नवंबर तक की 15 दिन की अवधि में झगड़े, मारपीट आदि के 189 मामले जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हुए। वहीं नोटबंदी के बाद नौ से 22 नवंबर तक की 15 दिन की अवधि में यह संख्या 147 हो गई। इसी तरह नोटबंदी से पहले 15 दिन में लूट का एक मामला और बाद के 15 दिन में एक भी नहीं, अपहरण के पहले सात  बाद में तीन मामले, चोरी के पहले 19 बाद में 14 मामले ही दर्ज हुए हैं। साथ ही एसपी को विभिन्न मामलों की शिकायत लेकर पहुंचने वाले परिवादी भी लगभग आधे हो गए हैं। जिसके चलते अब कार्यालय में गहमागहमी कम ही दिखाई देती हैं।