खबर - हर्ष स्वामी
बिमारी के चलते तीन साल से प्रभुदयाल चारपाई पर गुजार रहा जीवन
प्रशासन नही ले रहा सुध
सिंघाना. रायपुर जाटान के लकवाग्रस्त प्रभुदयाल का परिवार बिमारी के चलते अभावग्रस्त जीवन यापन करने को मजबुर हो रहा है। प्रभुदयाल सैलून की दुकान में नाई का काम करके अपने पांच सदस्यों के परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लेकिन तीन साल पहले दुकान पर काम करते हुए पैरो में पक्षाघात हुआ तो उसकी जिंदगी चारपाई तक ही सिमट कर रह गई। चलना-फिरना तो दुर की बात स्वयं के लिए नित्यक्रम करना भी मुश्किल हो गया। परिवार का लालन पालन करने वाले मुखिया के चारपाई पकडऩे से परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। पांच सदस्यों में तीन बेटियां व एक बेटे सहित मां का बोझ भी प्रभुदयाल के कंधे पर ही था। दो बेटियों की शादीयां तो दुकान चलाते समय ही कर दी गई थी लेकिन अब बचे तीन बच्चों की पढ़ाई व शादी तो दूर उनके खाने पीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया। शुरूआत में परिवार ने प्रभुदयाल के ईलाज के लिए घर में जमा पूंजी भी लगा दी लेकिन बिमारी का ईलाज नही हो सका रिश्तेदारों व लोगों से कर्ज लेकर भी ईलाज कराने की कोशिश की लेकिन कोई सुधार नही हुआ। आज चारपाई पर बैठे 45 वर्षीय प्रभुदयाल व उसका परिवार मदद के लिए दरवाजे पर टक-टकी लगाये देखते रहते है कि कही से कोई फरिश्ता आये और परिवार की मदद करे।
सरकार से भी नही मिली कोई मदद
प्रभुदयाल ने बिमारी के शुरूआती दिनो में स्वयं ईलाज करवाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नही हुआ और घर में जमा पूंजी भी खत्म हो गई। जमा पूंजि खत्म होने से परिवार के सदस्यों के सामने खाने के लाले पडऩे लगे तो चलने फिरने में मजबुर प्रभुदयाल ने प्रशासन से सहायता की गुहर लगाई लेकिन कहते है जिसका राम रूठ जाए तो उसकी परछाई भी साथ छोड़ देती है। पैरो से लाचार होने के बावजुद पिड़ीत परिवार को ना तो बीपीएल की सुविधा दी गई और ना ही सरकार से मिलने वाली पैंशन व रसद विभाग से मिलने वाला राशन या खाद्य सामग्री मिल रही है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि नेता चुनावो के समय वोटों के लिए तो बार बार चक्कर लगाते है। लेकिन अब मुशीबत के समय किसी के पास यह तक पुछने का भी समय नही है कि हालात कैसे है सहायता करना तो दूर की बात है।
पत्नि मजदुरी कर चला रही परिवार
पिड़ीत प्रभुदयाल ने बताया कि मेरे खाट पकडऩे के बाद घर में बच्चों के लालन पालन की सारी जिम्मेदारी पत्नि राजबाला के कंधो पर आ पड़ी। पत्नि ने मनरेगा में मजदुरी की और बच्चों की पढाई के लिए बाहर भी मजदुरी करने में कोई संकोच नही किया। लेकिन पिता की देखभाल के लिए 12 वीं क्लाश में पढ़़ रहे बेटे की भी पढ़ाई बीच मं छोडऩी पड़ी। परिवार की दयनीय हालात के चलते आठवीं क्लाश में पढ़ रही बेटी की पढ़ाई कभी भी छुट सकती है। प्रभुदयाल ने बताया कि शुरूआत में भाई से कर्जा लेकर ईलाज व घर का जरूरी सामान लेकर आये। अब राजबाला मनेरगा में मजदुरी कर जो रूपये लाती है उसी से घर खर्च चलाया जा रहा है।
इनका कहना है:-
ग्रामसेवक को मौके पर भेजकर पुरी जानकारी जुटाई जायेगी। अगर परिवार के मुखिया चारपाई पर और कमाने वाला कोई नही है तो परिवार को नियमानुसार सहायता दिलवाई जायेगी।
राजपाल सिंह तंवर
विकास अधिकारी, बुहाना
बिमारी के चलते तीन साल से प्रभुदयाल चारपाई पर गुजार रहा जीवन
प्रशासन नही ले रहा सुध
सिंघाना. रायपुर जाटान के लकवाग्रस्त प्रभुदयाल का परिवार बिमारी के चलते अभावग्रस्त जीवन यापन करने को मजबुर हो रहा है। प्रभुदयाल सैलून की दुकान में नाई का काम करके अपने पांच सदस्यों के परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लेकिन तीन साल पहले दुकान पर काम करते हुए पैरो में पक्षाघात हुआ तो उसकी जिंदगी चारपाई तक ही सिमट कर रह गई। चलना-फिरना तो दुर की बात स्वयं के लिए नित्यक्रम करना भी मुश्किल हो गया। परिवार का लालन पालन करने वाले मुखिया के चारपाई पकडऩे से परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। पांच सदस्यों में तीन बेटियां व एक बेटे सहित मां का बोझ भी प्रभुदयाल के कंधे पर ही था। दो बेटियों की शादीयां तो दुकान चलाते समय ही कर दी गई थी लेकिन अब बचे तीन बच्चों की पढ़ाई व शादी तो दूर उनके खाने पीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया। शुरूआत में परिवार ने प्रभुदयाल के ईलाज के लिए घर में जमा पूंजी भी लगा दी लेकिन बिमारी का ईलाज नही हो सका रिश्तेदारों व लोगों से कर्ज लेकर भी ईलाज कराने की कोशिश की लेकिन कोई सुधार नही हुआ। आज चारपाई पर बैठे 45 वर्षीय प्रभुदयाल व उसका परिवार मदद के लिए दरवाजे पर टक-टकी लगाये देखते रहते है कि कही से कोई फरिश्ता आये और परिवार की मदद करे।
सरकार से भी नही मिली कोई मदद
प्रभुदयाल ने बिमारी के शुरूआती दिनो में स्वयं ईलाज करवाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नही हुआ और घर में जमा पूंजी भी खत्म हो गई। जमा पूंजि खत्म होने से परिवार के सदस्यों के सामने खाने के लाले पडऩे लगे तो चलने फिरने में मजबुर प्रभुदयाल ने प्रशासन से सहायता की गुहर लगाई लेकिन कहते है जिसका राम रूठ जाए तो उसकी परछाई भी साथ छोड़ देती है। पैरो से लाचार होने के बावजुद पिड़ीत परिवार को ना तो बीपीएल की सुविधा दी गई और ना ही सरकार से मिलने वाली पैंशन व रसद विभाग से मिलने वाला राशन या खाद्य सामग्री मिल रही है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि नेता चुनावो के समय वोटों के लिए तो बार बार चक्कर लगाते है। लेकिन अब मुशीबत के समय किसी के पास यह तक पुछने का भी समय नही है कि हालात कैसे है सहायता करना तो दूर की बात है।
पत्नि मजदुरी कर चला रही परिवार
पिड़ीत प्रभुदयाल ने बताया कि मेरे खाट पकडऩे के बाद घर में बच्चों के लालन पालन की सारी जिम्मेदारी पत्नि राजबाला के कंधो पर आ पड़ी। पत्नि ने मनरेगा में मजदुरी की और बच्चों की पढाई के लिए बाहर भी मजदुरी करने में कोई संकोच नही किया। लेकिन पिता की देखभाल के लिए 12 वीं क्लाश में पढ़़ रहे बेटे की भी पढ़ाई बीच मं छोडऩी पड़ी। परिवार की दयनीय हालात के चलते आठवीं क्लाश में पढ़ रही बेटी की पढ़ाई कभी भी छुट सकती है। प्रभुदयाल ने बताया कि शुरूआत में भाई से कर्जा लेकर ईलाज व घर का जरूरी सामान लेकर आये। अब राजबाला मनेरगा में मजदुरी कर जो रूपये लाती है उसी से घर खर्च चलाया जा रहा है।
इनका कहना है:-
ग्रामसेवक को मौके पर भेजकर पुरी जानकारी जुटाई जायेगी। अगर परिवार के मुखिया चारपाई पर और कमाने वाला कोई नही है तो परिवार को नियमानुसार सहायता दिलवाई जायेगी।
राजपाल सिंह तंवर
विकास अधिकारी, बुहाना
