खबर - हर्ष स्वामी
डॉक्टर रामकला को वापस लगाने को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन
मांग नही मानी तो होगा बड़ा आंदोलन
सिंघाना. दो महीने पहले कस्बे के सीएचसी से महला चिकित्सक रामकला यादव का तबादला तातीजा पीएचसी पर कर दिया गया था जिसको लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों ने अस्पताल के सामने नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल को पीएचसी से सीएचसी में कन्वर्ट करवाने में ग्रामीणों ने भरपुर सहयोग किया था। सीएचसी के लिए कस्बे के भामाशाह जुगलकिशोर अग्रवाल ने अपनी करोड़ों रूपए की पुस्तैनी धर्मशाला अस्पताल के लिए दान की उसके बाद ग्रामीणों ने जनसहयोग से धर्मशाला का जिर्णोद्धार करवाया अस्पताल में स्ट्रेचर, व्हील चेयर, एसी, पंखे, कुलर सहित काफी संख्या में सामान डोनेट करके अस्पताल को जिले के दुसरे नम्बर का अस्पताल बना दिया। सिंघाना सीएचसी निजी अस्पतालों को टक्कर देने लगा था। ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालिन अस्पताल प्रभारी डॉ. रामकला यादव ने भी अस्पताल के निर्माण में भरपुर सहयोग किया लेकिन अस्पताल बनते ही डॉक्टर रामकला यादव का तबादला कर दिया गया। जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश बना हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द डॉ. रामकला यादव को सिंघाना सीएचसी पर लगाया जाए जिससे मरीजों को राहत मिले। इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि अशोक नायक, किशोरी गोठवाल, कमल सैन, गोविन्द जांगिड़, राधेश्याम, शशिकांत शर्मा, सुरेश डीलर, संजय गद्दुका, नरेन्द्र शर्मा, हरिराम सर्राफ, पवन हंसराज, राजेश मीणा, बाबुलाल नायक, मोनू सैन, पंच जया, पंच संतोष देवी, पुष्पा देवी, मंजू, विमला, जानकी देवी समेत अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
ओपीडी व डिलेवरी हुई कम
ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर रामकला यादव के मृदुभाषी व व्यवहार कुशल होने के चलते पहले अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ लगी रहती थी। डॉ. रामकला के जाने के बाद पिछले दो तीन महिने से अस्पताल की व्यवस्था खराब हो गई है। समय पर मरीजों को दवाई नही मिलती है ना ही जांच हो पा रही है। ओपीडी 6 सौ से 7 सौ के करीब थी जो अब घटकर तीन सौ से चार सौ रह गई। वहीं महिने में 50 से 60 डिलेवरी होती थी जो अब नाममात्र की रह गई है। जिसको लेकर ग्रामीण काफी आक्रोशित है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्था गड़बड़ाने से मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबुर हो गए है। अगर विभाग ने जल्द ही डॉ. रामकला यादव को वापिस सिंघाना सीएचसी में नही लगाया तो बड़ा आंदोलन किया जायेगा।
सीएमएचओ के आश्वासन पर हुए शांत
ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद मौके पर पहुंचे थानाधिकारी अशोक चौधरी ने लोगों को समझाईश की। इसके बाद ग्रामीणों ने जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएन धौलपुरिया से फोन पर बात की तो सीएमएचओ ने लोगों को जल्द ही समस्या के समाधान का आश्वासन दिया तब जाकर ग्रामीण शांत हुए।
मांग नही मानी तो होगा बड़ा आंदोलन
सिंघाना. दो महीने पहले कस्बे के सीएचसी से महला चिकित्सक रामकला यादव का तबादला तातीजा पीएचसी पर कर दिया गया था जिसको लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों ने अस्पताल के सामने नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल को पीएचसी से सीएचसी में कन्वर्ट करवाने में ग्रामीणों ने भरपुर सहयोग किया था। सीएचसी के लिए कस्बे के भामाशाह जुगलकिशोर अग्रवाल ने अपनी करोड़ों रूपए की पुस्तैनी धर्मशाला अस्पताल के लिए दान की उसके बाद ग्रामीणों ने जनसहयोग से धर्मशाला का जिर्णोद्धार करवाया अस्पताल में स्ट्रेचर, व्हील चेयर, एसी, पंखे, कुलर सहित काफी संख्या में सामान डोनेट करके अस्पताल को जिले के दुसरे नम्बर का अस्पताल बना दिया। सिंघाना सीएचसी निजी अस्पतालों को टक्कर देने लगा था। ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालिन अस्पताल प्रभारी डॉ. रामकला यादव ने भी अस्पताल के निर्माण में भरपुर सहयोग किया लेकिन अस्पताल बनते ही डॉक्टर रामकला यादव का तबादला कर दिया गया। जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश बना हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द डॉ. रामकला यादव को सिंघाना सीएचसी पर लगाया जाए जिससे मरीजों को राहत मिले। इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि अशोक नायक, किशोरी गोठवाल, कमल सैन, गोविन्द जांगिड़, राधेश्याम, शशिकांत शर्मा, सुरेश डीलर, संजय गद्दुका, नरेन्द्र शर्मा, हरिराम सर्राफ, पवन हंसराज, राजेश मीणा, बाबुलाल नायक, मोनू सैन, पंच जया, पंच संतोष देवी, पुष्पा देवी, मंजू, विमला, जानकी देवी समेत अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
ओपीडी व डिलेवरी हुई कम
ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर रामकला यादव के मृदुभाषी व व्यवहार कुशल होने के चलते पहले अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ लगी रहती थी। डॉ. रामकला के जाने के बाद पिछले दो तीन महिने से अस्पताल की व्यवस्था खराब हो गई है। समय पर मरीजों को दवाई नही मिलती है ना ही जांच हो पा रही है। ओपीडी 6 सौ से 7 सौ के करीब थी जो अब घटकर तीन सौ से चार सौ रह गई। वहीं महिने में 50 से 60 डिलेवरी होती थी जो अब नाममात्र की रह गई है। जिसको लेकर ग्रामीण काफी आक्रोशित है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्था गड़बड़ाने से मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबुर हो गए है। अगर विभाग ने जल्द ही डॉ. रामकला यादव को वापिस सिंघाना सीएचसी में नही लगाया तो बड़ा आंदोलन किया जायेगा।
सीएमएचओ के आश्वासन पर हुए शांत
ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद मौके पर पहुंचे थानाधिकारी अशोक चौधरी ने लोगों को समझाईश की। इसके बाद ग्रामीणों ने जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएन धौलपुरिया से फोन पर बात की तो सीएमएचओ ने लोगों को जल्द ही समस्या के समाधान का आश्वासन दिया तब जाकर ग्रामीण शांत हुए।

