खबर - राजकुमार चोटिया
सुजानगढ़- कस्बे के दुलियां बास मौहल्ले के ताराचंद स्वामी ने गंगोत्री से दो कावड़ लाकर एक ठरड़ा स्थित शिवालय पर चढ़ाई तथा दूसरी दुलियां बास में स्वामियों के मौहल्ले में स्थित बालाजी मन्दिर में चढ़ाई। 21 दिन में गंगोत्री से 1200 किमी की यात्रा के बाद सुजानगढ़ पंहूचने पर ताराचंद स्वामी का शहर वासियों ने स्वागत किया। रामचंद्र स्वामी, नेमीचंद नाई, ओमप्रकाश स्वामी, भंवरलाल प्रजापत, सुरेन्द्र प्रजापत, विकास सोनी, बद्रीप्रसाद स्वामी, धनेश स्वामी, भगवानदास स्वामी, बालचंद प्रजापत, महेश स्वामी, पूसादास स्वामी, किशोरदास स्वामी, सौरभ पीपलवा सहित अनेक लोगों ने सुजानगढ़ पंहूचने पर ताराचंद स्वामी का स्वागत किया। नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए डीजे पर शिव भजनों की धुन पर शिवालय एवं बालाजी मन्दिर लेकर पंहूचकर कावड़ चढ़ाई।
सुजानगढ़- कस्बे के दुलियां बास मौहल्ले के ताराचंद स्वामी ने गंगोत्री से दो कावड़ लाकर एक ठरड़ा स्थित शिवालय पर चढ़ाई तथा दूसरी दुलियां बास में स्वामियों के मौहल्ले में स्थित बालाजी मन्दिर में चढ़ाई। 21 दिन में गंगोत्री से 1200 किमी की यात्रा के बाद सुजानगढ़ पंहूचने पर ताराचंद स्वामी का शहर वासियों ने स्वागत किया। रामचंद्र स्वामी, नेमीचंद नाई, ओमप्रकाश स्वामी, भंवरलाल प्रजापत, सुरेन्द्र प्रजापत, विकास सोनी, बद्रीप्रसाद स्वामी, धनेश स्वामी, भगवानदास स्वामी, बालचंद प्रजापत, महेश स्वामी, पूसादास स्वामी, किशोरदास स्वामी, सौरभ पीपलवा सहित अनेक लोगों ने सुजानगढ़ पंहूचने पर ताराचंद स्वामी का स्वागत किया। नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए डीजे पर शिव भजनों की धुन पर शिवालय एवं बालाजी मन्दिर लेकर पंहूचकर कावड़ चढ़ाई।
