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चलो किसी ने तो इस मुद्दे को उठाया

खबर - पवन शर्मा
मिडडे मिल कार्य की जिम्मेदारी से शिक्षकों को दूर करने की मांग 
सांसद संतोष अहलावत ने लोकसभा में उठाया मिडडे मिल का मुद्दा 
सूरजगढ़ । सरकारी स्कूलों में अध्यापको को शिक्षा के अलावा अन्य जिम्मेदारियां सौंपे जाने का विरोध जहां दबे सुर में शिक्षक उठाते आये है अब इस मामले की गूंज संसद में भी सुनाई देने लगी है। गुरुवार को सांसद संतोष अहलावत ने संसद में अध्यापकों को मिडडे मिल कार्य की जिम्मेदारी से मुक्त किये जाने का मुद्दा उठाया। संसद के शून्यकाल सत्र के दौरान सांसद अहलावत ने स्कूलों में बच्चो को मिलने वाले मिडडे का मुद्दा उठाते हुए स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को इस कार्य से हटाकर केवल बच्चो को शिक्षित करने के कार्य में लगाए जाने की मांग की। शून्यकाल में इस मुद्दे पर  बोलते हुए कहा की सरकार की बच्चो को मिडडे मिल देने की योजना सराहनीय है , लेकिन शिक्षकों को इस कार्य में लगाए जाने से बच्चो की शिक्षा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सांसद अहलावत में बताया कि पहले स्कूलों में निरीक्षण के दौरान बच्चों से उनकी शिक्षा से संबधित प्रश्न पूछे जाते थे परंतु वर्तमान में निरीक्षण के दौरान अधिकारियो का ध्यान मिडडे मिल की व्यस्था पर अधिक रहता है। यह समस्या तब ज्यादा गंभीर बन जाती है जब स्कूलों में एक या दो ही अध्यापक हो। ग्रामीणों क्षेत्रो में ऐसी स्कूलों की संख्या ज्यादा है। समय व संसाधनों की कमी के कारण अध्यापक अपना अधिकांश समय इस योजना को क्रियांवित करने में लगा देते है। जिसका सीधा सा असर बच्चो की शिक्षा पर पड़ता है और वह परीक्षा परिणामो में निजी स्कूलों से पिछड़ जाता है। वही कई बार इस कार्य में लापरवाही होने के कारण बच्चो के स्वास्थ्य भी बिगड़ जाता है। सांसद अहलावत ने सरकार से मांग करते हुए कहा की जिस तरह से कई राज्यों में मिडडे मिल का कार्य निजी संस्थानों व सामाजिक सेवा संस्थानों से कराया जा रहा है उसी तरह से राजस्थान के विधालयो में मिडडे मिल की व्यवस्था के लिए निजी संस्थानों या सामाजिक सेवा संस्थानों को नियुक्त किया जाए जिससे बच्चो को अच्छे भोजन के साथ साथ अच्छी शिक्षा भी मिल सके।