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मानवाधिकार आयोग के शरण में जायेगें मीरा के परिजन

खबर - जयनारायण बिस्सा
बीकानेर ।
जहां राज्य सरकार न्याय आपके द्वार जैसे जनकल्याणकारी अभियान चलाकर आमजन को न्याय दिलाने का काम कर रही है,वहीं दूसरी ओर शासन  व प्रशासन में  बैठे सरकार के ही नुमाईदें आमजन को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में रोड़ा बने बैठे है। पिछले एक डेढ़ माह से न्याय नहीं मिलने से दु:खी मीरा हिरावत के परिजन अब राष्ट्रीय व  राज्य मानवाधिकार आयोग की शरण लेने को मजबूर है और वे अपना वाद इन आयोगों के समक्ष रखकर न्याय में आ रही सरकारी अड़चनों की शिकायत करेंगे। मीरा हीरावत  के भाई प्रदीप ने बताया कि वे अपनी बहन को न्याय दिलाने के लिये लगभग डेढ़ माह से कभी पुलिस तो कभी चिकित्सा विभाग के चक्कर काट रहे है,किन्तु यहां के अधिक ारी उनकी बात सुनने की बजाय कोई न कोई बहाना बनाकर मामले को लंबित करने का प्रयास कर रहे है। उन्होंने बताया कि न तो नोखा पुलिस मामले की तह तक जाकर  तफ्तीश कर रही है और न ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इस प्रकरण की गंभीरता को समझ कर कोई ठोस कार्यवाही कर रहे है। ऐसे में अब उनके पास न्याय का  एक ही द्वार दिखाई देता है कि वे राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग को अपनी फरियाद सुनाकर दोषियों पर कार्यवाही करवायें।
राजनीतिक दबाब के चलते अधिकारी नहीं ले रहे है कोई फैसला
बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता और केन्द्रीय मंत्री का खासा दबाव है। जिसके चलते नोखा पुलिस और चिकित्सा विभाग के  आलाधिकारी कोई कार्यवाही कर रहे है। हांलाकि इस मामले में प्रथम दृष्टया की जांच में सुराना नृसिंग होम को दोषाी पाया गया है फिर भी उस पर ठोस कार्यवाही से अधिक ारीगण कतर रा रहे है। उसकी वजह राजनीतिक दबाव का होना बताया जा रहा है।
ये है पूरा मामला
नोखा निवासी मीरा हीरावत की डिलेवरी 14 जून को नोखा स्थित सुराना नर्सिग होम में दोपहर को हुई। शाम को मीरा के परिजनों ने चिकित्सक को मरीज के सीने व कमर में   दर्द की शिकायत की गई। जिस पर दर्द निवारक इन्जेक्शन लगाकर नर्सिग होम के स्टॉफकर्मियों ने इतिश्री कर ली। रात 12 बजे तक तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो फिर से   परिजनों ने डॉ अनिल सुराना से बात की। इस पर डॉ ताव में आ गये और उन्होंने मरीज को पीबीएम रैफर कर दिया। परिजन मीरा को रात्रि को ही पीबीएम लेकर पहुंचे और   आईसीयू में भर्ती करवाया,जहां भर्ती रूके में मीरा के पिछले पांच घंटे से सीने व पेट में दर्द होना बताया। साथ ही पिछले दो घंटे से इसके शरीर में किसी प्रकार की कोई  हलचल  भी नहीं हो रही है यानि अचेतन अवस्था में था मरीज और मरीज की पिछले एक घंटे से श्वास की गति भी बहुत धीमी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पांच घंटे से सीने  में दर्द था  तो उसी समय उसकी ईसीजी क्यों नहीं कि जबकि उसकी ईसीजी सुबह 6 बजे की गई।
नहीं हो रही सुनवाई
सुराणा नर्सिग होम  के चिकित्सकों की लापरवाही से हुई मीरा हीरावत की मौत से आक्रोशित परिजनों को न्याय नहीं मिल रहा है ,वे न्याय के लिये पुलिस एवं चिकित्सा  अधिक ारियों के चक्कर लगा रहे है। मृतका के पति सुमित हीरावत का कहना है एक माह से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। राजनीतिक दबाव  के साथ साथ सामाजिक स्तर पर दोषी चिकित्सक उन पर दबाव डालकर मामले को रफा दफा करवाना चाहते है। हीरावत ने कहा कि दोषी खुले आम अनर्गल बयानबाजी कर  रहे है और उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद भी कार्यवाही को लेकर टालमटोल की स्थिति बनी हुई है। जांच अधिकारी यह कहकर  टाल देते है कि पीबीएम और चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट आने के बाद अपने आप कार्यवाही कर दी जायेगी। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। पुलिस अपनी जांच कर उसकी रिपोर्ट  सक्षम अधिकारी को सौंप देती है।