खबर - जयंत खांखरा
खेतड़ी- सोमवार को कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित फ़तेह विलास सार्वजनिक पुस्तकालय में ए टी ओ रामकिशन की अध्यक्षता में लेखक प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर बहादुर सिंह शर्मा, गोविंदराम हरितवाल, संतोष शर्मा , नागर मल सैनी, राजेंद्र प्रसाद गुर्जर, हरिराम शर्मा,बलबीर भालोटिया ने मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। इस मौके पर पुस्तकालय अध्यक्ष चौथमल सैनी ने मुंशी प्रेमचंद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी और उर्दू के महानतम लेखकों में से एक है मुंशी प्रेमचंद। पुस्तकालय की ओर से सुमन देवी ने आगंतुकों को जानकारी देते हुए बताया कि महान लेखक प्रेमचंद का जन्म 1880 में उत्तर प्रदेश में हुआ उनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव था लेकिन उन्हें मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाना जाता है। मुंशी प्रेमचंद ने 300 से अधिक कहानियां लगभग 15 उपन्यास तीन नाटक 7 से अधिक बाल पुस्तके लिखी जो सभी अपने आप में अद्भुत है। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों की ख्याति इतनी अधिक हो गई कि उनके उपन्यास गोदान, कर्मभूमि , गबन , रंगभूमि पर हिंदी फिल्में भी बन चुकी हैं।
खेतड़ी- सोमवार को कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित फ़तेह विलास सार्वजनिक पुस्तकालय में ए टी ओ रामकिशन की अध्यक्षता में लेखक प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर बहादुर सिंह शर्मा, गोविंदराम हरितवाल, संतोष शर्मा , नागर मल सैनी, राजेंद्र प्रसाद गुर्जर, हरिराम शर्मा,बलबीर भालोटिया ने मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। इस मौके पर पुस्तकालय अध्यक्ष चौथमल सैनी ने मुंशी प्रेमचंद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी और उर्दू के महानतम लेखकों में से एक है मुंशी प्रेमचंद। पुस्तकालय की ओर से सुमन देवी ने आगंतुकों को जानकारी देते हुए बताया कि महान लेखक प्रेमचंद का जन्म 1880 में उत्तर प्रदेश में हुआ उनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव था लेकिन उन्हें मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाना जाता है। मुंशी प्रेमचंद ने 300 से अधिक कहानियां लगभग 15 उपन्यास तीन नाटक 7 से अधिक बाल पुस्तके लिखी जो सभी अपने आप में अद्भुत है। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों की ख्याति इतनी अधिक हो गई कि उनके उपन्यास गोदान, कर्मभूमि , गबन , रंगभूमि पर हिंदी फिल्में भी बन चुकी हैं।
