खबर - राजकुमार चोटिया
सुजानगढ़- शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक नही होने से प्रसुता महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिला मरीजों ने बताया कि डेढ़ लाख की आबादी वाले शहर के सौ बैड वाले अस्पताल में महिला चिकित्सक नही हैं। जिससे महिलाएं मजबूरन पुरूष चिकित्सक से डिलवरी करवाने को विवश है। हालांकि सरकारी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ डी. आर. जाटोलिया काफी वर्षो से यहां कार्यरत है। शहर की विभिन्न समाजिक संस्थाओं ने जिले के तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ एवं क्षेत्रिय विधायक खेमाराम मेघवाल सहित जनप्रतिनिधियो को महिला चिकित्सक को लगाने की गुहार की, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान नही किया। परिणाम वही ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक नही होने से आज भी महिला सम्बधित रोग के बारे स्पष्ट बताने में महिला शर्माती है। जिससे मरीजों को मजबूरन निजी क्लिनिकों की शरण लेनी पड़ रही है। समाजसेवी एवं आर.टी.आई कार्यकत्र्ता बसन्त बोरड ने बताया कि राजकीय चिकित्सालय में महिला रोग से सम्बधित महिला चिकित्सक नही होने से महिलाओ को भारी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है । बोरड़ ने चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ से महिला चिकित्सक लगाने की मांग की है। सरकारी अस्पताल में रोजना 6-7 से अधिक डिलेवरी होती है । चिकित्सा प्रभारी एन. के. प्रधान ने बताया कि पूर्व में महिला रोग विशेषज्ञ डा. सुनीता जैन थी उसके बाद महिला रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ डी. आर. जाटोलिया पुरूष चिकित्सक के रूप में कार्यरत है, प्रतिदिन आधा दर्जन से अधिक प्रसव करवाये जाते है अधिकांश नॉरमल डिलेवरी करवायी जाती है ।
सुजानगढ़- शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक नही होने से प्रसुता महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिला मरीजों ने बताया कि डेढ़ लाख की आबादी वाले शहर के सौ बैड वाले अस्पताल में महिला चिकित्सक नही हैं। जिससे महिलाएं मजबूरन पुरूष चिकित्सक से डिलवरी करवाने को विवश है। हालांकि सरकारी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ डी. आर. जाटोलिया काफी वर्षो से यहां कार्यरत है। शहर की विभिन्न समाजिक संस्थाओं ने जिले के तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ एवं क्षेत्रिय विधायक खेमाराम मेघवाल सहित जनप्रतिनिधियो को महिला चिकित्सक को लगाने की गुहार की, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान नही किया। परिणाम वही ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक नही होने से आज भी महिला सम्बधित रोग के बारे स्पष्ट बताने में महिला शर्माती है। जिससे मरीजों को मजबूरन निजी क्लिनिकों की शरण लेनी पड़ रही है। समाजसेवी एवं आर.टी.आई कार्यकत्र्ता बसन्त बोरड ने बताया कि राजकीय चिकित्सालय में महिला रोग से सम्बधित महिला चिकित्सक नही होने से महिलाओ को भारी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है । बोरड़ ने चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ से महिला चिकित्सक लगाने की मांग की है। सरकारी अस्पताल में रोजना 6-7 से अधिक डिलेवरी होती है । चिकित्सा प्रभारी एन. के. प्रधान ने बताया कि पूर्व में महिला रोग विशेषज्ञ डा. सुनीता जैन थी उसके बाद महिला रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ डी. आर. जाटोलिया पुरूष चिकित्सक के रूप में कार्यरत है, प्रतिदिन आधा दर्जन से अधिक प्रसव करवाये जाते है अधिकांश नॉरमल डिलेवरी करवायी जाती है ।
