खबर - मनोज मिश्रा
बिसाऊः-...कस्बे की मूक रामलीला को आज तक 180 वर्ष पूर्ण हो चुके है।शेखावाटी अंचल की यह प्रमुख मूक रामलीला है जो विश्व प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष की भांति इस लीला काशुभारम्भ सन्त बाबा बर्फानी का जब से बिसाऊ मे आगमन हुआ है तभी से यह उन्ही के कर कमलो से शुभारम्भ कि परमपरा चली आरही है। गौरतलब है कि राजा दशरथ द्वारा यज्ञ की रष्म अदा की गई तदुपरान्त चारो राज कुमार राम,भरत,लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ और ताडका वध तक की लीला की गई। यह लीला पूर्णिमां तक चलेगी। पूर्णिमां को राम तिलक कर समापन कर दिया जायेगा। 15 दिनो तक काफी दर्शक इकठठे रहते है एवं काफी दूकाने भी लगती है। यह सांय 5 से 8 बजे तक मंचित होती है। लीला के प्रवन्धक महेन्द्र पारीक ने अपनी कौषलता के साथ सहयगियो द्वारा लीला के काम मे आनेवाले अस्त्र-शास्त्रों एवं वेषभूषा तथा अन्य सामग्रीयो की पूर्ण तैयारी की है।
बिसाऊः-...कस्बे की मूक रामलीला को आज तक 180 वर्ष पूर्ण हो चुके है।शेखावाटी अंचल की यह प्रमुख मूक रामलीला है जो विश्व प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष की भांति इस लीला काशुभारम्भ सन्त बाबा बर्फानी का जब से बिसाऊ मे आगमन हुआ है तभी से यह उन्ही के कर कमलो से शुभारम्भ कि परमपरा चली आरही है। गौरतलब है कि राजा दशरथ द्वारा यज्ञ की रष्म अदा की गई तदुपरान्त चारो राज कुमार राम,भरत,लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ और ताडका वध तक की लीला की गई। यह लीला पूर्णिमां तक चलेगी। पूर्णिमां को राम तिलक कर समापन कर दिया जायेगा। 15 दिनो तक काफी दर्शक इकठठे रहते है एवं काफी दूकाने भी लगती है। यह सांय 5 से 8 बजे तक मंचित होती है। लीला के प्रवन्धक महेन्द्र पारीक ने अपनी कौषलता के साथ सहयगियो द्वारा लीला के काम मे आनेवाले अस्त्र-शास्त्रों एवं वेषभूषा तथा अन्य सामग्रीयो की पूर्ण तैयारी की है।
