खबर - अनिल शर्मा
शिमला  –
खेतडी उपखण्ड की ग्राम पंचायत मेहाडा से शेरशाह सूरी की जन्म स्थली के नाम से विख्यात ग्राम शिमला जाने वाली सडक पुरी तरहं टूट चुकी है। सडक मे हर कदम पर इतने गडडे है कि उक्त मार्ग से सफर करना बडा ही मुश्किल है। लम्बे समय से विभाग इसकी सुध नही ले रहा है पूर्व जिला कलेक्टर प्रदीप कुमार बोरड ने भी इस सडक पर सफर किया था। तथा उन्होने बताया था कि 10 किमी लम्बा सफर तय करने के लिये उन्हे 1 घन्टे का समय लगा जिससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि सडक है या खडडे। हर कदम पर क्षतिग्रस्त सडक से हर कोई परेशान है। हरियााणा सीमा के गाँव गोद बलाहा जहाँ से जिला मुख्यालय तथा राजधानी दिल्ली जाने वाली मुख्य सडक है उसको भी यहं मार्ग जोडता है। उलेखन्नीय है शिमला गाँव झुंझुनू जिले का ऐतिहासिक महत्व का गाँव है दिल्ली की राजगदी पर विराजमान होने वाले शेरशाह सूरी की यही जन्म स्थली है। दिल्ली मे ग्रांड ट्रंक रोड सर्वप्रथम शेरशाह सूरी ने ही बनवाया था। आज उन्ही की जन्म स्थली चारो तरफ टूटी सडको की मार झेल रही है। टूटी सडकों के कारण उनके आस पास रहने वालेे लोग दमा व साँस के मरीज बन चुके है तथा वाहन चालक भी परेशान है क्योकिं उनके वाहन रोजाना पंक्चर हो जाते है तथा पटटे कबानी तोड देते है। यहीं हाल शिमला से ढोसी वाया दूधवा, शिमला से खेतडी नगर वाया रवाँ, सडको का भी बुरा हाल है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधी दूधवा सरपंच सत्यवीर गुर्जर, गौरीर सरपंच राजबीर मान, शिमला सरपंच धर्मेन्द्र यादव, ढोसी सरपंच पूजा चौधरी, रवाँ सरपंच रेखा जेवरिया ने पंचायत समिति की बैठको मे तथा जिला पार्षद सूबेसिहं ने जिला परिषद की बैठको मे यह मुददा उठाया है तथा अनेक बार ग्रामीणो ने यूथ काँग्रेस के जिला महासचिव अनिल शर्मा के नेतृत्व मे ज्ञापन भी दिये है लेकिन इन सडको की मरम्मत की तरफ सार्वजनिक निर्माण विभाग ने आज तक ध्यान नही दिया है। टूटी सडको के कारण क्षेत्र का विकास भी अवरूद्ध हो रहा है। ग्रामीणो ने अब आन्दोलन का रूख अख्तियार करने का निर्णय लिया है। एक तरफ सरकार विकास का ढींढोरा पीट रही है वहीं ये सडक अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। इस सडक पर वाहन लेकर चलना तो दूर की बात है पैदल चलना भी खतरे से खाली नही है क्योंकि सडक कम है गडडे अधिक हैं। ऐसे मे वाहन चालक बडे परेशान है उनके वाहन दुगुना तो तेल पीते हैं तथा दुगुना समय लगता है। यह बात कलेक्टर साहब भी मान चुके हैं। तथा उन्होने गत दिनो शिमला प्रवास के दोरान इस सडक की मरम्मत के निर्देश भी दिये थे। लेकिन अधिकारियों के कान पर आज तक भी जंू तक नही रेंगी। इस सडक पर पडने वाले गाँवों की जनता बुरी तरह से परेशान है। लेकिन सुनने वाला कोई नही है