कर्जमाफी की घोषणा कहीं कागजी पुलिंदा न बन जाए

खबर - प्रशांत गौड़ 
-राज्य की केन्द्र पर टिकी आस!
-राज्य में वर्तमान वित्तीय प्रबंधन पर पड़ सकती है भारी 
जयपुर। कर्जमाफी की घोषणा वर्तमान सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लडख़ड़ा सकती है। कर्ज का मर्ज झेल रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर यह लोक-लुभावनी घोषणा भारी पड़ सकती है और इसको अमलीजामा पहनाने में लंबा समय लग सकता है। राज्य की अब इस मामले में केन्द्र पर आस टिकी है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि केन्द्र से उम्मीद थी कि वह सहयोग की बात करेंगे और बोलेंगे कि हमारी सरकार नहीं बनी लेकिन राज्य को पूरा सहयोग दिया जाएगा। उन्होंनें कहा कि सुखद बात यह होती कि पीएम मोदी खुद कहते डोंट वरी केद्र राज्य के साथ है लेकिन ऐसा नहींहुआ। इन बयानों से साफ  अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार की चुनाव से पूर्व लोकलुभावनी घोषणआों को अमलीजामा पहनाना कांटो पर चलना जैसा हो सकता है।
 पूर्व शासन के समय ही कई बड़ी योजनाएं वित्तीय प्रबंधन कमजोर होने के कारण अटकी अब वर्तमान सरकार की लोकलुभावी घोषणाओं को अमलीजामा पहनाना अभी प्रदेश के वित्तीय ढ़ाचे को और चरमर्रा सकता है। एक अनुमान की माने तो सरकारी कर्मचारियों से संबंधित विभिन्न घोषणाएं भी खराब वित्तीय प्रबंधन के चक्कर में अटकी रही। अब वर्तमान कांग्रेस सरकार के समय में भी की गई घोषणाओं को अमलीजामा पहनाना और वित्त जुटाना कांटो पर चलने से कम नहीं है।

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