खबर - हिमांशु मिढ़ा
हनुमानगढ़। आज कृषक चक एएमपी, एमलेडी, एमएमके, लीलन, भक्तपुरा व अन्य गांवों के ग्रामीणों ने आज जिला कलक्टर को बागवानी हेतु पानी उपलब्धता बाबत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के अनुसार भाखडा नहरी परियोजना अन्तर्गत कृषि भूमि में करीब 1000 बीद्या भूमि पर किन्नु के बाग लगाकर बागवानी कर रहे है। हमारे खेतों में भाखडा परियोजना की एएमपी, एमजेडी, एमएमके, लीलन, भक्तपुरा माईनर स पानी लगाया जाता है। हमारे खेतों के लिये भाखडा प्रणाली की नहरे अमृतदायिनी है। बागवानी भी विभिन्न सरकारी योजनाओं से प्रेरित होकर ही गई है और पानी बचाने के लिए बुंद बुंद सिंचाई योजना के तहत डिग्गी निर्माण भी किया है। जिसमें नहरोमें बंदी होने की सूरत में डिग्गी भरकर हम डिग्गी से पानी लगाकर बागवानी करते है। भाखडा नहर की बंदी अप्रैल मई में होती है एवं बंदी के दौरान ही किन्नु के पोधों को सर्वाधिक पानी की आवश्यता होती है और अगर इन्हे पानी न मिला तो सारी फसल खराब हो जायेगी। उक्त बंदी भी कई सालों तक चलेगी। जिससे बंदी के दौरान हमारी खडी फसल जो हमारी संतान के समान है हमारी आंखों के सामने बर्बाद हो जायेगी। ग्रामीणों ने मांग कि है कि नहर बंदी के दौरान हमारे खेतों में निर्मित डिग्गी को भरवाये जाने के आदेश फरमाये इस बाबत उद्यान विभाग व नहरी विभाग को पाबंद किया जाये। डिग्गी भरने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित नही होती है। ज्ञापन देने वालों में जितेन्द्र सारस्वत, नरेश गोदराा, इन्द्रपुरा, हरपाल सिंह, अमनदीप सिंह, गुलाब सिंह बराड, अमनदीप, सुखमन्द्र सिंह व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
हनुमानगढ़। आज कृषक चक एएमपी, एमलेडी, एमएमके, लीलन, भक्तपुरा व अन्य गांवों के ग्रामीणों ने आज जिला कलक्टर को बागवानी हेतु पानी उपलब्धता बाबत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के अनुसार भाखडा नहरी परियोजना अन्तर्गत कृषि भूमि में करीब 1000 बीद्या भूमि पर किन्नु के बाग लगाकर बागवानी कर रहे है। हमारे खेतों में भाखडा परियोजना की एएमपी, एमजेडी, एमएमके, लीलन, भक्तपुरा माईनर स पानी लगाया जाता है। हमारे खेतों के लिये भाखडा प्रणाली की नहरे अमृतदायिनी है। बागवानी भी विभिन्न सरकारी योजनाओं से प्रेरित होकर ही गई है और पानी बचाने के लिए बुंद बुंद सिंचाई योजना के तहत डिग्गी निर्माण भी किया है। जिसमें नहरोमें बंदी होने की सूरत में डिग्गी भरकर हम डिग्गी से पानी लगाकर बागवानी करते है। भाखडा नहर की बंदी अप्रैल मई में होती है एवं बंदी के दौरान ही किन्नु के पोधों को सर्वाधिक पानी की आवश्यता होती है और अगर इन्हे पानी न मिला तो सारी फसल खराब हो जायेगी। उक्त बंदी भी कई सालों तक चलेगी। जिससे बंदी के दौरान हमारी खडी फसल जो हमारी संतान के समान है हमारी आंखों के सामने बर्बाद हो जायेगी। ग्रामीणों ने मांग कि है कि नहर बंदी के दौरान हमारे खेतों में निर्मित डिग्गी को भरवाये जाने के आदेश फरमाये इस बाबत उद्यान विभाग व नहरी विभाग को पाबंद किया जाये। डिग्गी भरने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित नही होती है। ज्ञापन देने वालों में जितेन्द्र सारस्वत, नरेश गोदराा, इन्द्रपुरा, हरपाल सिंह, अमनदीप सिंह, गुलाब सिंह बराड, अमनदीप, सुखमन्द्र सिंह व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
