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भारतीय मूल्यों का साहित्य में समावेश हो - देवनानी

डीडवानाशिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने भारतीय संस्कृति के मूल्यों के आधार पर साहित्य सृजन का आह्वान किया है। शिक्षा राज्य मंत्री रविवार को नागौर जिले के डीडवाना में पं. बच्छराज व्यास आदर्श विद्या मंदिर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित मारवाड (जोधपुर) प्रान्तीय साहित्यकार सम्मेलन में शिरकत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक संकीर्णता तथा विकृतियों को साहित्यकार ही समाप्त कर सकता है। अत: साहित्यकारों को भारतीय संस्कृति के अनुसार उद्देश्यपूर्ण साहित्य का सृजन करना चाहिए। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे भारतीय मूल्यों के आधार पर लेखन तथा भारत की श्रेष्ठ परम्पराओं का ज्ञान कराने वाले साहित्य के सृजन की आवश्यकता जताई।  प्रो. देवनानी ने शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के मूल्यों की स्थापना के लिए पिछले छह-सात माह में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों का जिक्र करते हुए  कहा कि अब कक्षा छह, सात व आठ के पाठ्यक्रमों में महापुरुषों के पाठ शामिल किए जा रहे हैं। साहित्य सम्मेलन के पहले सत्र में शिक्षा मंत्री ने साहित्यकार  दशरथ सिंह खेडिया की ''थावर'',  रामेश्वर लाल की ''मां'' तथा  सोहन योगी की ''मुक्ति पथ'' पुस्तकों का विमोचन भी किया।    शिक्षा राज्य  मंत्री ने नई पीढ़ी को साहित्य के माध्यम से नैतिकता के संस्कार देने की बात कही। उन्होंने बताया कि सरकार के स्तर पर भी सरकारी विद्यालयों में प्रत्येक शनिवार को नैतिक शिक्षा का एक पीरियड जोडा गया है। इसमें विद्यार्थियों को महापुरुषों की जीवनियों के आधार पर नैतिकता के बारे में बताया जाएगा। उन्होंने साहित्यकारों से भी नैतिकता का संवाहक बनने का आग्रह किया। उन्होंने इस कार्य के लिए साहित्यकारों का आगे आने का आह्वान किया ताकि सामूहिक प्रयत्नों से भारतीय संस्कृति व मूल्यों की रक्षा की जा सके।   प्रो. देवनानी ने डीडवाना में आयोजित सम्मान समारोह में सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के चलते इस वर्ष मई माह में ही अभी तक एक लाख नामांकन हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकारी स्कूलों के प्रति बढी विश्वसनीयता को दर्शाता है। उन्होंने सरकारी स्कूलों में नामांकन बढाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत बताई।