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यह समझौता गुर्जरों के साथ धोखा:विधूडी



खबर - जीतेन्द्र सिंह  राजावत
 कहा अब आरक्षण हमारे समान का सवाल है।
जयपुर।
अखिल भारतीय गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामवीर सिंह विधूडी ने कहा है कि राज्य सरकार और गुर्जर नेताओं के बीच हुए समझौते से समाज को कुछ भी हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार 50 ्रप्रतिशत के भीतर ही समाज को आरक्षण अन्यथा छह माह बाद नई दिल्ली में देशभर के गुर्जर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब आरक्षण नौकरी के लिए नहीं बल्कि हमारे समान का सवाल बन गया है। विधूडी शनिवार को राजधानी में प्रेसवार्ता के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने राज्य सरकार और कर्नल बैंसला की मंशा पर भी सवाल उठाए और कहा कि वसुंधरा राजे अगले साऐ 3 साल में भी गुर्जरों को आरक्षण दे देवे तो वे भव्य कार्यक्रम आयोजित वसुंधरा और कर्नल बैंसला को सोने से तोल देंगे।
उन्होंने कहा कि यह सब जानते हैं कि सरकार ने गुर्जरों के साथ जो भी समझौता किया है, वह पूरा होना संभव नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 50 फ ीसदी से ज्यादा आरक्षण दिया ही नहीं जा सकता। ऐसे में सरकार गुर्जरों को मूर्ख बना रही है। आरक्षित 50 फ ीसदी के अंदर से ही गुर्जरों को अलग से 5 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की जानी चाहिए। सरकार का मौजूदा समझौता निश्चित रूप से फिर से कोर्ट में उलझने वाला है, जैसा पहले हुआ था। सरकार ओबीसी के दो टुकड़े करे। एक बैकवर्ड और दूसरा अति बैकवर्ड। इसी के तहत समाधान निकाला जा सकता है।
इस दौरान विधूडी ने राज्य सरकार पर पिछले समझौते की पालना नहीं करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में हुए आंदोलन के दौरान करीब 600 गुर्जरों पर मुकदमे लगाए गए थे जिन्हें समझौते के तहत वापस लेना था किन्तु सरकार ने एक भी मुकदमा वापस नहीं लिया। उन्होंने इस मामले में बैंसला की नीयत पर भी सवाल खडे किए कि उन्होंने वार्ता के दौरान मुकदमे वापस लेने की मांग क्यों नहीं की। विधूडी ने बताया कि राज्य सरकार ने तो समझौता कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है किन्तु नवीं अनुसूची में शामिल करवाने का काम केन्द्र सरकार को करना है। इसलिए अब तक तो राज्य सरकार से संघर्ष था किन्तु अब केन्द्र सरकार के साथ संघर्ष करना बाकी है। विधूड़ी ने कहा कि वे उनके समाज के लोगों की ओर से कर्नल बैसला के नेतृत्व में किए जा रहे आंदोलन का समर्थन नहीं करते। यह आंदोलन हिंसात्मक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाला है। लोगों को परेशान करने वाला है। ऐसे आंदोलन से बचना चाहिए।