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वेटरनरी विश्वविद्यालय स्थापना दिवस समोराह

खबर -  जयनारायण बिस्सा 
पांच वर्ष में उल्लेखनीय सफलता, शैक्षणिक विकास में ही राष्ट्र निर्माण का भाव निहित: कुलपति प्रो. पड्या
मेगा बकरी फार्म, हर्बल पौध पर शोध कार्य और 165 शिक्षकों की भर्ती के कार्य इसी वर्ष में: कुलपति प्रो. गहलोत
बीकानेर। किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रगति और विकास में ही महान राष्ट्र के निर्माण का भाव निहित होता है। राज्य के पहले वेटरनरी विश्वविद्यालय ने 5 वर्ष के अल्पकाल में ही देश और विदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर उल्लेखनीय सफलता पाई है। ये उद्गार महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. चंद्रकला पड्या ने सोमवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह में व्यक्त किए। प्रो. पडय़ा सोमवार को वेटरनरी कॉलेज प्रेक्षागृह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई। उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत की दूरदर्शिता पूर्ण व गतिशील सोच के साथ नवाचारों और कार्य संस्कृति के लिए बधाई दी। प्रो. पड्या ने कहा कि छात्रों में हमारा भविष्य निहित है। उन्होंने छात्रों को अज्ञानता के प्रति सतर्क रह कर ज्ञान पिपासु बनने का आह्नवान किया। उन्होंने महान वैज्ञानिक न्यूटन और दार्शनिक बर्टन रसैल का उदाहरण देते हुए कहा कि शोध की असीमित संभावनाएं और ज्ञान का भंडार मौजूद है अत: वे पशुचिकित्सा विज्ञान और पशुपालन क्षेत्र के विकास में अपनी असरदार भूमिका निभाएं। उन्होंने जीवन में सफलता के लिए जोशो-खरोश के साथ कार्य करने को कहा। छात्र जीवन में मिले अवसरों का पूरा लाभ उठाकर ही टिकाऊ और सफल जीवन की बुनियाद रखी जा सकती है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने कहा कि किसी भी संस्थान की छवि उसके विद्यार्थियों से बनती हैं। एक व्यक्ति से सफलता नहीं मिलती। टीम राजुवास के अथक प्रयासों से विश्वविद्यालय ने देश-विदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज की हैं। उन्होनें कहा कि महज डिग्री हांसिल करना हमारा उद्देश्य नहीं है, ज्ञान में ही शक्ति है। अत: जीवन में सफलता के लिए निरंतर सीखने की प्रवृति जरूरी हैं। विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद नित कुछ नया करने की प्रवृति को अपनाते हुए समाज और शासन की आवश्कयताओं के मद्देनजर कार्य किया जा रहा है। जीवन में सफलता के लिए कोई ‘शार्ट कट’ नही है। विश्वविद्यालय ने 165 शिक्षकों की भर्ती का कार्य शुरू किया गया है। आयुर्वेट के साथ कारपोरेट उत्पादन के लिए चिश्रौडग़ढ़ पशुधन अनुसंधान केन्द्र में औषधीय पौधों पर शोध कार्य शुरू किया जाकर डग (झालावाड़) में 8वां पशुधन अनुसंधान केन्द्र इस वर्ष शुरू किया जाएगा। धौलपुर में स्वंयसेवी संस्था के साथ मिलकर मेगा बकरी फॉर्म भी शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन के साथ भी एक परियोजना पर भी कार्य शुरू किया गया हैं। विश्वविद्यालय सभी प्रमुख क्षेत्रों में नवाचारों के साथ पशुपालकों के हित में कार्य करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
समारोह के प्रारंभ में वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने विश्वविद्यालय द्वारा गत 5 वर्ष में शैक्षाणिक, अनुसंधान, प्रसार, प्रशासनिक क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों और नवाचारों पर विस्तृत रिपोर्ट अपने प्रजेन्टेशन में प्रस्तुत की। इस अवसर पर अतिथियों ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट के नवीन संस्करण का लोकार्पण किया। जनसम्पर्क प्रकोष्ठ द्वारा तैयार "राजुवास की 5 वर्षों के सफर का सिंहावलोकन" और पांरपरिक पशुचिकित्सा विषय पर प्रकाशित फोल्डर का भी विमोचन किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. राकेश राव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो. मनीषा माथुर ने कार्यक्रम का संचालन किया। समोराह में वित्तनियंत्रक वाई.के. सिंह सहित डीन-डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, अधिकारी, छात्र-छात्राएं एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।