खबर - अरविन्द मिश्रा
मोहनधाम में मनाया गया भगवान श्रीराम जन्मोत्सव,वर्णन कीया गया श्रीराम की बाल लीलाओं का
सालासर-धार्मिक नगरी सालासर धाम में हो रही मोहनधाम में श्रीराम कथा के पंचम दिवसाीय विश्वप्रसिध्द कथा वाचक पूज्य रमेश भाई ओझा ने बताय की हर एक व्यक्ति के पास पैसा होना बहुत जरूरी है,संसार में दरिद्रता मनुष्य के जीवन में सबसे बडा दुश्मन है तो वह परमार्थ के रास्ते पर बढ नहीं सकता। मगर साथ ही वो भी दरिद्र है जिसकी तृष्णा विशाल हो उसके लालच के चलते वो बेईमानी करता है वो चाहे बडी कोठी में ही भले ही रहता हो मगर वो दरिद्र है । संतोष सबसे बडा सुख है धर्म ,सत्य,परोपकार अगर नहीं है तो वह व्यर्थ है बिना अर्थ के कमाया हुआ धन संतोष नहीं दे सकता है। संसार मे जितने भी अपराध हो रहे है वो अर्थ संबन्धी ही हो रहा है। संयम नहीं है उनके जीवन में ।सही रास्ते पर चलाने के लिए तीन व्यवस्थायें है धर्म,समाज,कानून ये तीन है धर्म का पालन कीजिये,तुलसीदासजी ने यमुना की संज्ञा दी है। संयम ही जीवन है जिसके जीवन में धर्म है वो श्रेष्ठ है हमे सीधे रास्ते पर चलाने के लिए सु समाज का होना जरूरी है और उन सबका पालन करना जरूरी है जो भगवन भक्ति नहीं जानते है वो भी समाज के लोग होते है। संपूर्ण मानव समाज को सुव्यवस्थ्ति रखने के लिए तीन नीतियां होनी चाहिए। जो धर्म का पालन करते है वो पूजनीय है जीवन में सतोष धैर्य होना आवश्यक है।धर्म अर्थ काम और मोक्ष ये चार परमार्थ है। तुलसीदास जी कहते है दरिद्रता के अलावा कोई दुख नहीं है । सत्संग मनुष्य का सबसे बडा सुख है। रावण ने अनिती से धन अर्जित किया था तो विभीषण के राज्याभिष्ेाक पर भगवान श्रीराम ने कहा की इस धन से सुख नहीं होगा तो साथ ही मेरे भक्त का पतन नहीं हो सकता है इसलिए ये अनीती की संपति विभिषण के पास नहीं रहनी चाहिए। तात्पर्य है कि अनीती से कमाये हुए धन को संचय नहीं करना चाहिए वो ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता है।राम का नाम ही सर्वत्र व्यापक है रामजन्मोत्सव की लीलाओं का वर्णन करते हुए भाई ओझा जी ने बताया की अयोध्या नगरी मंत्रमुग्ध हो गई जहां पर श्रीराम का जन्म हुआ वो धरती धन्य है जहां ऐसे देव का अवतरण हुआ है। बाल्यकाल का वर्णन करते हुए बताया की भगवान श्रीराम तो बाल्यकाल से ही लीला कर रहे थे। इस अवसर पर कथा आरम्भ होने से पूर्व पं.भंवरलालशर्मा विधायक सरदारशहर,पूर्व मंत्री राजैन्द्र पारीक सीकर,श्यामसंुदर अग्रवाल,दिनेश अग्रवाल,संतकुमार टिबरेवाल, केशव अग्रवाल,महावीर प्रसाद पुजारी, विजयकुमार पुजारी,भंवरलाल पुजारी, रविशंकर पुजारी,सत्यप्रकाश पुजारी, धर्मवीर पुजारी,लक्ष्मीनारायण पुजारी,मनोज पुजारी,मनेाज भाणेज,प्रधान गणेश ढाका, अशोक तोदी,बिहारीलाल पुजारी,सक्षम पुजारी, रामजीलाल पुजारी,भगवती प्रसाद पुजारी,बजरंगलाल तापडीया, कैलाश क्याल, ओमप्रकाश पटवारी सहित किशनगढ रैनवाल से आये हुए भक्तजनों कथा वाचक पूज्य रमेश भाई ओझा एवं यजमान श्यामसुंदर अग्रवाल का स्वागत किया एवं व्यास पीठ की पूजा अर्चना की एवं आरती 