खबर - अरविन्द मिश्रा
श्रीरामकथा का पांडाल हनुमानजी महाराज की पूंछ की तरह बढा,करीबन 13हजार से ज्यादा श्रध्दालुओं की भीड
सालासर-आस्था और विश्वास की नगरी सालासर धाम में स्थानिय मोहन धाम में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिवस की कथा में पूज्य विश्वप्रसिध्द रमेश भाई औझा ने समय के काल चक्र की व्याख्या करते हुए कहा की सूर्य उदय होता है और छिप जाता है,उगते हुए सूर्यभगवान केा नमन करते हुए दिन की शुरूआत होती है। समय केा ध्यान में रखते हुए चलना चाहिए। पुराने समय में त्रिकाल संध्या की जाती थी।संध्या का समय भजन का होता है,मनुष्य का शरीर घुटनों के बल से चलना सीखता है और अंत में घुटनों के सहारे ही चला जाता है। भगवान का आभार मानना चाहिए इस मानव रूपी शरीर को दिया है। भगवान ने जो दिया है उसमें संतुष्ट रहना सीखें और उसका सदपयोग कीजिए। साथ ही भगवान श्रीराम के यज्ञोपवित संस्कार केे बारे मंे बताते हुए कहा की यज्ञोपवित संस्कार गुरूओं के समीप ले जाने का माध्यम है। श्रीराम सहित चारों भाई गुरू के आश्रम में विद्या ग्रहण करने के लिए गये। विद्या वो कहलाती है जो भविष्य का निर्माण करती हो। आजकल की शिक्षा पध्दति मंे रात और दिन का अंतर हो चुका है। भाईजी ने बताया की भगवान का भक्त निर्भय रहता है उसे चिंता नहीं करनी चाहिए। विश्वामित्र के विद्या आश्रम दानवों ने ताण्डव मचा रखा था तो सभी सेाच में थे कि सुना है भगवान श्रीराम का जन्म हो गया है तो फिर रक्षा करने क्यूं नहीं आते इस पर विश्वामित्र सहायता के लिए अयोध्या नगरी पहुंचे। जहां राजा दशरथ ने प्रणाम कर आसन पर बैठाया और अपने चारों पुत्रों राम,लक्ष्मण,भरत और शत्रुधन से कहा की रिषीवर को प्रणाम करिये। कृपा भगवान का कार्य नहीं स्वभाव है।महामुनि विश्वामित्र ने कहा की लोगों से सुना है श्रीराम महाराज दशरथ के जिनका जन्म हुआ है इस संसार की रक्षा करने के लिए ऐसे प्रतापी,ज्ञानी को आश्रम की रक्षा के लिए आग्रह करने आये है । असुर परेशान कर रहे है आश्रम में और इसकी रक्षा करने हेतु राम नाम विशाल है उजाले यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने कब जिंदगी की शाम गुजर जाये। हे भगवान श्रीराम सदा हम पर कृपा बनाये रखे ऐसे कर्म करते रहना चाहिए। भगवान श्रीराम के विद्या अध्ययन का प्रसंग सुनाया। कथा की पूजा अर्चना श्यामसंुदर अग्रवाल,संत कुमार टिबडैवाल,दिनेश अग्रवाल, पूर्व सांसद रामदास अग्रवाल,राजकुमार सरावगी,बंसतीलाल पुजारी,पूर्व विधायक रामेश्वर भाटी, महंत मनोहरशरणदास,बालव्यास चंद्रप्रकाश शास्त्री, सातडा धाम के ज्ञाननाथ जी ,निम्बार्क संप्रदाय के जुगलकिशोर, भंवरलाल पुजारी,विजय कुमार पुजारी, बिहारीलाल पुजारी,पवन पुजारी,बालचंद प्रजापत, रामजीलाल पुजारी ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना की एवं आरती की।
