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अशिक्षा को दूर करने की आज सबसे बड़ी आवश्यकता - न्यायाधिपति लोढ़ा


बिलाडा। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संगीत राज लोढ़ा ने शिक्षा का अधिकार कानून की विस्तृत व्याख्या एवं इसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अशिक्षा को दूर करने की आज सबसे बड़ी आवश्यकता है। समाज में पढने की जरूरत समझकर छ: से चौदह वर्ष तक का हर बच्चा स्कूल जाएं और शिक्षा प्राप्त करें, ऐसी संकल्पबद्वता होनी जरूरी है। न्यायाधिपति लोढ़ा रविवार को जोधपुर के बिलाडा में राजकीय सीनियर माध्यमिक स्कूल में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित मेघा विधिक चेतना एवं लोक कल्याणकारी शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समस्याओं का कारण अशिक्षा है और निदान शिक्षा है। छ: से चौदह वर्ष तक के बच्चों का स्कूल में नामंाकन ही नहीं हो, बल्कि उनको गुणवतापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं भी मुहैय्या होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा को एक मिशन के रूप में लिया जाए, अशिक्षा को दूर करने का संकल्प लेकर अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून में यह भी प्रावधान है कि पंचायत, निकाय विभाग व अन्य संबंधित संस्थाएं 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों का शिक्षा संबंधी ब्यौरा रखें। अनिवार्य शिक्षा का ध्यान रखें और प्रत्येक बालक बालिका स्कूल जाएं। लोक कल्याणकारी सरकार का भी दायित्व है कि कोई बच्चा अशिक्षित नहीं रहें। उन्होंनें आह्वान किया कि सभी परिजन 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को स्कूल लेकर जाएं और उनको शिक्षा से जोड़े, बच्चों को स्कूल भेजने का अभियान चलाए। उन्होंने बताया कि नए कानून में यह भी प्रावधान है कि शैक्षणिक सत्र के मध्य भी स्कूल में दाखिला दिया जाएगा।