Breaking News

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

मनुष्य इस संसार का मुसाफिर है मालिक नहीं -रमेश भाई ओझा

खबर - अरविन्द मिश्रा 
सालासर-सिध्दपीठ सालासर धाम में हो रही श्रीराम कथा के अष्टम दिवसिय में विश्व प्रसिध्द कथा वाचक पूज्य श्री रमेश भाईजी ओझा ने बताया की ये मनुष्य शरीर तो एक धर्मशाला,सराय की तरह है जहां पर विश्राम कर सकते हैं और दूसरे दिन का ही ठिकाना नहीं रहता अत हे मनुष्य तु संसार की ईन्द्रियांे में ही खोया रहेगा क्या जो साधक है वो साधना करते है,इस संसार में पाप करोगे तो नरक की प्राप्ति होती है और अच्छे कर्म करोगे तो स्वर्ग की प्राप्ति है,एक मनुष्य अच्छा कर्म करे तो नर से नारायण बन सकता है,तुलसीदासजी कहते है जिसने राम को जाना वो राम बना। त्याग और समर्पण की भावना का दूसरा नाम है भगवान श्रीराम। यदि निष्ठा से राम को भजोगे तो सभी कष्टों का निवारण होगा। भगवान का अर्थ है धर्म,नीति ,न्याय ये श्रीराम के नाम है।  भक्तों में जो श्रध्दा होती है वहीं लक्ष्मी है हनुमानजी में अटूट विश्वास ही श्रध्दा है। हे मनुष्य तुम तो इस संसार के मुसाफिर हो मालिक नहीं अर्थात संतोष सबसे बडा सुख है संतोष करते रहना चाहिए।श्रीराम कथा ही ऐसा माध्यम है जो लोगों को बताती है जीवन में शांति और सुख कैसे प्राप्त किया जा सकता है। श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सीता माता के स्वयंवर में जब शिवधनुष आये हुए सभी राजकुमार नहीं तोड पाये जो राजा जनक ने कहा कि क्या वीरों की भूमि में ऐसा कोई नहीं है जो मेरी पुत्री के स्वंयवर में शिवधनुष नहंी उठा पा रहे है तभी लक्ष्मण जी क्रेाधित हो गये और कहा की इसी सभा में रघुवर श्रीराम भी है अभी ऐसा नहीं है कि ये शिवधनुष कोई नहीं उठा सकता। तो विश्वामित्र जी ने श्रीराम को कहा कि उठो और शिव धनुष को तोडो क्योंकि राजा जनक को चिंता हो रही है कि उसकी पुत्री सीता का विवाह नहंी होगा तो एक पिता को चिंता होती है इसलिए प्रभु  भगवान श्रीराम के द्वारा शिवधनुष को तोडना जिससे सभी आश्चर्य चकित हो गये राजा जनक के दरबार मे इसी बीच परशुराम जी का आना और क्रोधित होना कि ऐसा वीर कौन है जिसने धनुष को तोडा ये कोई साधारण मानव तो नहीं है। तो भगवान श्रीराम ने बडे ही विवेक और माधुर्यता के साथ उतर दिया की ये कोई और नहीं आपका सेवक है। प्रभु के ऐसे वचन सुनकर परशुरामजी प्रसन्न हुए। व्यास पीठ की पूजा अर्चना श्याम सुंदर अग्रवाल,रामनरेश अग्रवाल,केशव अग्रवाल,सांवरमल पुजारी,सत्यप्रकाश पुजारी, विजय कुमार पुजारी, भंवरलाल पुजारी,धर्मवीर पुजारी, मनोज भाणेज,मनोज पुजारी,रामचंद्रढाका, गुडावडीसरपंच महैन्द्र ढुकिया, प्रधान गणेश ढाका, गोपीराम प्रजापत, रामपाल ढाका,अंकित पुजारी,राकेश कपीन्द्र पुजारी,सुरेश पुजारी,बिहारीलाल पुजारी,भगवती पुजारी,रामजीलाल पुजारी ने पूजा अर्चना की एंव आरती की।