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बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए व्यापक प्रबन्ध

ब्यावर।  प्रदेश में बाल विवाहों की रोकथाम के लिए समस्त जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिये गए हैं कि वे बाल विवाह की रोकथाम के लिए अपने-अपने क्षेत्रा में समुचित कदम उठाएं एवं सूचना प्राप्त होने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कानूनी कार्यवाही करें। बाल विवाह पर रोकथाम के लिए प्रदेश में गृह विभाग द्वारा ज़ारी पत्रा में कहा गया है कि अक्षय तृतीया  (आखातीज) 9 मई एवं पीपल पूर्णिमा 21 मई पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए समाज की मानसिकता एवं सोच में सकारात्मक परिर्वतन लाना आवश्यक है। इन अवसरों पर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाहों के आयोजनों की प्रबल सम्भावना रहती है।  बाल विवाह की रोकथाम के लिए विभिन्न विभाग जैसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग के ग्राम स्तरीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने के लिए कहा गया है। साथ ही पटवारी, अध्यापिका इत्यादि को बाल विवाह होने पर निकट के पुलिस स्टेशन में सूचना देने के लिए पाबंद किया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर सूचना बाॅक्स रखने एवं इसके लिए नियंत्राण कक्ष स्थापित करने को कहा गया है।  इसी प्रकार विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय स्तर पर बच्चों को बाल विवाह के दुष्परिणामों व इससे संबंधित विधिक प्रावधानों की जानकारी दें। ग्रामसभाओं में भी सामूहिक रूप  से बाल विवाह के दुष्प्रभावों की चर्चा एवं निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के साथ चेतना बैठकों का आयोजन करने का सुझाव भी दिया गया है। प्रिन्टिंग प्रेस वालों को कहा गया है कि वे विवाह हेतु छपने वाले निमन्त्राण पत्रा में वर-वधू की जन्म तारीख प्रिन्ट करने पर बल देने के साथ ही वर-वधू के आयु के प्रमाणपत्रा अपने पास रखे।