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छाएगी हरियाली तो लुभाएगी दीनारपुरा के पक्के जोहड़ की खूबसूरती

कुमार अजय 
जनसंपर्क अधिकारी सीकर 
सीकर। जिले के फतेहपुर इलाके के दीनारपुरा गांव में करीब दो सौ साल पहले बने पक्के जोहड़ को मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान ने नई जिंदगी दी है। जोहड़ के रिनोवेशन के बाद यहां लगाए गए एक हजार पौधे जब पेड़ बनेंगे और चारों तरफ हरियाली छाएगी तो जोहड़ की संवरी सूरत बेशक हर किसी को लुभाएगी। 
ग्रामीण बताते हैं कि पीने के पानी के लिए गांव के इस जोहड़ का र्निमाण करीब दो सौ साल पहले किया गया था। उस वक्त यह जोहड़ ग्रामीणों के लिए बहुत उपयोगी था और लोग पीने के लिए भी इसके पानी का भरपूर उपयोग करते थे। बाद में पेयजल के दूसरे स्रोतों को देखकर इस जोहड़ की अनदेखी हुई और उपेक्षा के कारण लोग यहां कचरा डालने लगे और यह बदहाली की स्थिति में आ गया। ऎसे में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान जब शुरू हुआ तो उसके पहले चरण में दीनारपुरा गांव को भी शामिल किया गया। अधिकारियों की नजर जब इस जोहड़ पर पड़ी तो उन्होंने इसे प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया और इस प्रकार 4.90 लाख की स्वीकृति के साथ ही इस जोहड़ के र्जीणोद्धार का काम शुरू हुआ। वन विभाग के संसाधनों के उपयोग के बाद इस काम पर केवल एक लाख 45 हजार 894 रुपए ही व्यय हुए और जोहड़ा अपने नए स्वरूप के साथ जल संरक्षण के लिए एकदम तैयार हो गया। पिछले दिनों मानसून में हुई बारिश के बाद इस जोहड़ में भरपूर पानी आया है। जोहड़ के पास स्थित भूमि पर जिला स्तरीय वन महोत्सव र्कायक्रम आयोजित कर विभिन्न प्रजातियों के करीब एक हजार पौधे लगवाए गए हैं। इन पौधों को जोहड़ का पानी मिल सकेगा और जब इन पौधों के विकसित होने के बाद यह वृक्षकुंज तैयार होगा तो निस्संदेह जोहड़ की खूबसूरती और वृक्षों की हरियाली आने वालों को लुभाएगी। 
इस रिनोवेशन र्काय की र्कायकारी एजेंसी वन विभाग के उप वन संरक्षक राजेंद्र हुड्डा बताते हैं कि इस तरह के स्ट्रक्र्चस से कई तरह के लाभ मिलते हैं। एक तरफ पेयजल संकट को देखते हुए इनका पानी उपयोग में लिया जा सकता है। दूसरी तरफ लगाए गए पौधे भी इस पानी से जीवित रह सकेंगे। साथ ही लोगों में पेयजल संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर एक जागरुकता भी विकसित होती है। ग्रामीण राजेंद्र किरोड़ीवाल कहते हैं कि सरकार के इस अभियान में लोगों में पानी के संरक्षण को लेकर एक नई सोच विकसित हुई है और यदि अभियान इसी तरह जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हम पेयजल संरक्षण की दिशा में दुनिया में एक मिसाल बनकर उभरेंगे।