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पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुखबिर योजना प्रारम्भ

पीसीपीएनडीटी उपखण्ड स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित
ब्यावर। गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 के तहत गठित पीसीपीएनडीटी उपखण्ड स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक शुक्रवार को जिला क्षय निवारण केन्द्र में आयोजित हुई, जिसमें सोनोग्राफी सेन्टरों के रजिस्ट्रेशन, नवीनीकरण, अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, मुखबिर योजना, रेड अलट, हैल्पलाईन आदि के संबंध में चर्चा की गई। 
उपखण्ड समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.शेखर शर्मा ने बैठक का एजेण्डा प्रस्तुत करते हुए बताया कि गत बैठक में हुए निर्णयों की अनुपालना करते हुए संबंधित विषयों पर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए उनका समाधान किया गया है। उन्होंने बताया कि समिति के समक्ष डॉ. गुलशन मलिक सोनोग्राफी सेन्टर व राठी अस्पताल के सोनोग्राफी सेन्टर के नवीनीकरण के आवेदन प्रस्तुत हुए हैं एवं माथुर सोनोग्राफी क्लिनिक द्वारा नई सोनोग्राफी मशीन को इंस्टाल करने संबंधी सूचना प्रस्तुत की गई है। जिस पर समिति सदस्यों ने चर्चा कर नियमानुसार नवीनीकरण करने पर सहमति दी।
बैठक में किसी भी सोनोग्र्राफी सेन्टर को नवीनीकरण के लिए 30 दिन पूर्व प्रार्थना पत्रा देने, समिति की बैठक 2 माह के अन्तराल में करने, सोनोग्राफी सेन्टर के रजिस्ट्रेशन संबंधी नये सर्कुलर, बंगाली व झोलाछाप डॉक्टर्स पर कार्यवाही आदि विषयों पर भी चर्चा हुई। इस मौके पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी चर्चा करते हुए मुखबिर योजना, रेडअलर्ट आदि के बारे में आमजन को जागरूक करने पर सदस्यों ने सहमति जताई। बैठक में समिति सदस्य क्रमशः सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी श्री विनोद मोलपरिया, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.पी.एम.बोहरा, डॉ. साबिर हुसैन, समाजसेवी ज्योति आर्य, डीपीपीएम दिनेश कुमार, श्री प्रकाश आर्य आदि मौजूद थे।
मुखबिर योजना
जिला समन्वयक पीसीपीएनडीटी ओमप्रकाश टेपन ने बताया कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुखबिर योजना प्रारम्भ की गई है। चिकित्सक को तकनीक के दुरूपयोग को रोकने के लिए गोपनीय रूप से सूचना, जनता से प्राप्त करना आवश्यक है तथा ऐसी सूचना प्रदान करने के लिए आमजन को अभिप्रेरित करना भी आवश्यक है। इस योजना के द्वारा लिंग-परीक्षण के दोषी व्यक्तियों तक विभाग की पहुंच को सुनिश्चित करते हुए उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सकता है।  समाज में यह संदेश दिया जा सकता है कि लिंग-परीक्षण करने, कराने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध जन सूचना के आधार पर उन्हें दण्डित किया जा सकता है। इसके लिए लिंग परीक्षण करने वाले व्यक्ति, चिकित्सक की सूचना विभाग को देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखते हुए उसके विभाग द्वारा पुरूस्कार प्रदान किया जाता है। 
पुरस्कार राशि 2 लाख रूपये 
मुखबिर के रूप  में लिंग-परीक्षण की सूचना देने वाले व्यक्ति को लिंग-परीक्षण की शिकायत सत्य पाये जाने एवं सफल डिकॉय कार्यवाही की जाने पर मुखबिर को 26 हजार 600 रूपये,  गर्भवती महिला को 26 हजार 600,  गर्भवती महिला के सहयोगी को 13 हजार 300 रूपये की राशि प्रथम किश्त के रूप  में दी जाएगी। इसके बाद न्यायालय में बयान के दौरान डिकॉय ऑपरेशन की स्पष्ट पुष्टि करने के पश्चात् मुखबिर को 26 हजार 600 रूपये, गर्भवती महिला को 26 हजार 600 रूपये, गर्भवती महिला के सहयोगी को 13 हजार 300 रूपये की राशि द्वितीय किश्त के रूप में दी जाएगी। इसी क्रम में न्यायालय के निर्णय के पश्चात् मुखबिर को 26 हजार 800 रूपये, गर्भवती महिला को 26 हजार 800 रूपये, गर्भवती महिला के सहयोगी को 13 हजार 400 रूपये की राशि तृतीय किश्त के रूप  में दी जाएगी। इस प्रकार कुल 2 लाख रूपये की राशि पुरूस्कार स्वरूप दी  जाएगी।