रिपोर्ट - मनोज मिश्रा
गांगियासर की राय भक्तो का संकट हरो करो बैल से गाय
घट स्थापना के साथ 1 से 10 अक्टूबर तक आयोजित होगा लखी मेला
मुख्य अतिथि होगी करूणागिरी,प्रथ्वी गिरी,अष्टमी व नवमी को होगा भण्डारा
9 व 10 अक्टूबर को होगी विशाल कुश्ती
बिसाऊः-..झुझुनूं शोखावाटी जनपद मे अनेक प्रसिद्ध शक्ति पीठ है परन्तु गंगियासर की रायमता मंदिर अपनी वैभवशाली परम्परा का अनुपम उदाहरण है। देवी के रूपमे विख्यात गंागियासर स्थल है। 6 से 8 हजार की आबादी वाले इस ग्राम की देवी रायमता के प्रकटीकरण का इतिहास चम्तकारी और रोचक है। श्रुति के अनुसार 270 वर्ष पूर्व ग्राम के दक्षिण की ओर ऊॅचे टीले पर सेवापुरी नामक तपस्वी सन्त रहते थे। जिन्हो ने जिवित समाधी लीथी। अचानक पृथ्वी वही एक निश्चित स्थान पर कम्पित होने लगी और कुछ ही गहराइ से व.सं.1600 मे दुर्गामता की मूर्ति प्रकट हुई। उसी समय आवाज आयी कि मै रायमता हूॅ,तुम मेरी पूजा करो। बस क्या था यह खबर आग कि तरह गांव मे ही नही अपितु आस पास के गांवो तक फैल गई। देवी के दर्शन करने के लिए हजारो ग्रामीण वहां पहुॅच गये। बाबा सेवापुरी जी के साथ सभी पे पूजा अर्चना कर वही देवी के मंदिर की स्थापना कर दी। तत्कालीन शासक देवदत भी वहां पहुॅच गये। तत्पश्चात उसी मंदिर को भव्य रूप देने मे ग्राम के कानोडिया परिवार का योगदन शुरू होगया। लोक श्रद्धा के अनुसार यही रायमता लोकप्रिय और कलियुग की चमत्कारी देवी के रूप मे प्रसिद्ध होगइ्र। मता के कई चमत्कार हुए चोर के बैल को उसकी पुकार पर उसे गाय बना दिया गया। तभी से यह कहरवत चरितार्थ हुई कि जय जननी मातेश्वरी गंागियासर की राय भक्तो का संकट हरो करो बैल से गाय। एक बार मीर खान पठान ने गांगिायासर ग्राम लूटने के लिए फौजो से घेर लिया तो ग्रामीण सन्त सेवापुरी महाराज की शरण मे पहुॅच कर संकट से बचने की प्राथना करने लगे। सन्त ने फौज का सामना करने को कहा और आर्शीर्वाद दिया कि तुम्हारी ही जीत होगी। परिणाम वही हुआ मीर खान की तोपे रूकगई। तोपो का मुह तक नही खुला। दूसरा हा्रष्य बडाहि विचित्र दिखाई दिया मीर खान ने देखा कि सिपाही कटते नजर आरहे है रणक्षेत्र मे एक स्त्री के हाथ मे तलवार और खप्पर लिए हुए उस की फौज के सिपाहियो के सिर धड से अलग थलग कर रही है। और एक साधू हाथ मे चीमटा लिए घूम रहा है। तब मीर खां के पावं उखड गये और मैदान छोडकर भग गया। एक साधू ने मां की परीक्षा लेने के लिए उनके गहने चुरा कर जाने लगा तो वह मंदिर से बहार आकर रास्ता भूल गया। और गहनो को जमीन मे गाड दिया चलते वक्त एक झाडी मे फंस गया क्यो कि वह अन्धा होगया था। प्रतः ग्रामीणो को जानकारी मिली तो उसे उसे पकड लिया और पूछने पर सब कुछ बतादिया। भेमा खाती जो पुजारी था उसने भक्तिवश अपना शीश काटकर मां को चढादिया लेकिन मां ने उसे पुनः जोड दिया। 36 वर्ष पूर्व एक चोर मां की मूर्ति चोर कर लेगया जो 10 किलो चांदी की थी लेकिन पटियाला मे वह पकडागया। एक बार रतिनाथ जी के साथ सवामणी के लिए आयी सेठानी जो माता के दरबार मे ही कुर्सि रख कर बैठगई थेडी ही देर मे हलवाइयो के सिलेण्डर ने आग पकडली। रतीनाथ जी यह चमत्कार जानगये सेठानी को कुर्सी से नीचे बैठाकर मां से प्रार्थना की तो आग शांत होगइ। माता जी के मेले मे विशेष आक्रषर्ण का केन्द्र दूर दराज से आये हुए पहलवानो की कुश्ती एवं कब्बडी है। यह प्रतियोगिता दो से तीन दिनो तक चलती है। प्रथम,द्वितीय व तृतीय विजेताओ को नकद देकर सम्मनानित किया जाता है। इस अवसर पर तीन दिवस तक भव्य मेला आयोजित होता है। इस लखी मेले मे दूर दराज तक के ग्रामीण लोग मेले मे सम्मलित होते है। इस मे पुलिस की कडी निग्रानी रहती है। यात्रीयो के ठहर ने के लिए धर्मशाला की सुविधा प्रदान है। इस ग्राम कि यह विशेषता है कि इस मेले मे हिन्दु और मुस्लिम सभी के परिवारो मे माता की मान्यता है। माता की सेवा मे रहे संत सर्वप्रथम शिवपुरी जी महाराज,श्रवणपुरीजी,भेला गिरीजी,खूबगिरीजी,बुद्वगिरीजी प्रथम एवं बुद्वगिरीजी द्वितीय,शांतिगिरीजी,विजयगिरीजी,वर्तमान मे बाबा दशम गिरी जी पीठ के सन्त है। इस मंदिर के के अधिनस्थ 162 बीघा 18 बिस्वा जमीन ठाकुर देवदत ने पटटा सहित भेंट की थी जो रायमाता बणी के नाम से जानी जाती है। मंदिर संचालन के लिए चुनाव होते है। पदाधिकारीगण मंदिर से सम्बन्धित कार्यो की व्यवस्था करते है। वर्तमान मे अध्यक्ष बनवारीलाल मीणा,उपाध्यक्ष स्वरूप सिंह शेखावत,मंत्री भवानी सिंह,संगठन मंत्री मूकेश जोशी एवं कोषाध्यक्ष पुरूषोतम बंका है।

