रिपोर्ट - हर्ष स्वामी
पानी सरंक्षीत करने के लिए रियासत काल में बने कई बांध, तालाब व बावडीयां
सरंक्षण के अभाव में जल सरंक्षण स्रौत हो रहे नकारा
खेतडी। मुख्यमंत्री की पानी बचाने की महत्वकांशी जल स्वावलम्बन योजना का पहला चरण पुरा हो चुका है अब दुसरा चरण शुरू किया गया है जिसमें शहरो, गांवो में पानी को सरंक्षीत करने के लिए अभियान के रूप में लेकर कार्य किये जा रहे है। वहीं खेतड़ी में रजवाड़ो के समय से ही जल स्वावलम्बन की योजनाएं चल रही थी। पानी बचाने के लिए राजा, महाराजाओं ने कई बांध, तालाब, कुंड व बावडीयों का निर्माण करवाये थे। लेकिन अब वो सब देखरेख के अभाव में नकारा साबित हो रहे है। कई बावड़ीयां तो कुडे के ढेर में तब्दील हो गई। कस्बे का एकमात्र पन्नासागर तालाब ही अपनी भव्यता को दर्शा रहा है। लेकिन उसमें भी बरसाती पानी आने के रास्ते अतिक्रमण की भेंट चढे हुए है। वर्तमान समय में अधिकांश कुंए, बावड़ीयां सुखे पडे हुए है। अगर इनको सहेज कर रखा जाये तो खेतड़ी में पानी की समस्या नही रहेगी। राजस्थान सरकार मोटा बजट इस योजना पर खर्च किया जा रहा है। वहीं खेतडी के जल प्रबन्धन एव संरक्षण की व्यवस्था रियासत काल से ही बेजोड एंव अनुठी एक पूरे राजस्थान के लिए मिशाल साबित हो सकती है खेतडी ठीकाना अपने आप में राजस्थान की गौरव गाथा तो कहता ही है वही जल स्वाबलम्बन में भी अपनी एक अलग छाप छोडी हुई है प्रिसंली वैल स्टेट के नाम से जानने वाला खेतडी ठीकाना में एक दर्जन बॉन्ध, पांच बावडी, दर्जनो कुए एव टांके है।
प्रमुख जल संरक्षण स्रौत
अजित सागर बांध, तीजों वाला बांध, क्षोभ सिंह का बांध, चॉदमारी वाला बांध, भोपालगढ के पर कोटे में एक बांध, परकोटे के बाहर दो बांध, चेलापुरी में एक बांध , झोझू के पास स्थित एक बॉध, धोबी घाट के पास सैनियो के मोहल्ले में एक बॉध, चादमारी के पीछे बावडी, नानूवाली बावडी, पपुरना बावडी, ईदगाह के पास बावडी, खेतडी पुस्तकालय के पास बावडी बने हुए है। साथ ही सात कुडं एवं तीन तालाब, दर्जनो कुए, भोपालगढ में तीन टांके तथा चार एनिकट है व बागोरगढ में एक विशाल टांका एंव दो छोटे टांके आज भी मौजूद है। खेतडी में बारिश के दिनो में झरने भी देखने को मिल जाता है एक झरना भोपालगढ में सन्निकट के निचे स्थित है वही एक झरना इदगाह के पास है जो अब अतिक्रमण की वजह से लुप्त हो गया है।
पानी सरंक्षीत करने के लिए रियासत काल में बने कई बांध, तालाब व बावडीयां
सरंक्षण के अभाव में जल सरंक्षण स्रौत हो रहे नकारा
खेतडी। मुख्यमंत्री की पानी बचाने की महत्वकांशी जल स्वावलम्बन योजना का पहला चरण पुरा हो चुका है अब दुसरा चरण शुरू किया गया है जिसमें शहरो, गांवो में पानी को सरंक्षीत करने के लिए अभियान के रूप में लेकर कार्य किये जा रहे है। वहीं खेतड़ी में रजवाड़ो के समय से ही जल स्वावलम्बन की योजनाएं चल रही थी। पानी बचाने के लिए राजा, महाराजाओं ने कई बांध, तालाब, कुंड व बावडीयों का निर्माण करवाये थे। लेकिन अब वो सब देखरेख के अभाव में नकारा साबित हो रहे है। कई बावड़ीयां तो कुडे के ढेर में तब्दील हो गई। कस्बे का एकमात्र पन्नासागर तालाब ही अपनी भव्यता को दर्शा रहा है। लेकिन उसमें भी बरसाती पानी आने के रास्ते अतिक्रमण की भेंट चढे हुए है। वर्तमान समय में अधिकांश कुंए, बावड़ीयां सुखे पडे हुए है। अगर इनको सहेज कर रखा जाये तो खेतड़ी में पानी की समस्या नही रहेगी। राजस्थान सरकार मोटा बजट इस योजना पर खर्च किया जा रहा है। वहीं खेतडी के जल प्रबन्धन एव संरक्षण की व्यवस्था रियासत काल से ही बेजोड एंव अनुठी एक पूरे राजस्थान के लिए मिशाल साबित हो सकती है खेतडी ठीकाना अपने आप में राजस्थान की गौरव गाथा तो कहता ही है वही जल स्वाबलम्बन में भी अपनी एक अलग छाप छोडी हुई है प्रिसंली वैल स्टेट के नाम से जानने वाला खेतडी ठीकाना में एक दर्जन बॉन्ध, पांच बावडी, दर्जनो कुए एव टांके है।
प्रमुख जल संरक्षण स्रौत
अजित सागर बांध, तीजों वाला बांध, क्षोभ सिंह का बांध, चॉदमारी वाला बांध, भोपालगढ के पर कोटे में एक बांध, परकोटे के बाहर दो बांध, चेलापुरी में एक बांध , झोझू के पास स्थित एक बॉध, धोबी घाट के पास सैनियो के मोहल्ले में एक बॉध, चादमारी के पीछे बावडी, नानूवाली बावडी, पपुरना बावडी, ईदगाह के पास बावडी, खेतडी पुस्तकालय के पास बावडी बने हुए है। साथ ही सात कुडं एवं तीन तालाब, दर्जनो कुए, भोपालगढ में तीन टांके तथा चार एनिकट है व बागोरगढ में एक विशाल टांका एंव दो छोटे टांके आज भी मौजूद है। खेतडी में बारिश के दिनो में झरने भी देखने को मिल जाता है एक झरना भोपालगढ में सन्निकट के निचे स्थित है वही एक झरना इदगाह के पास है जो अब अतिक्रमण की वजह से लुप्त हो गया है।
अपनी असल कहानी कहता पन्नाशाह तालाब
खेतडी के पन्नाशाह तालाब कलाकृती एव भव्यता का बेजोड नमुना है और साथ ही इसकी जल प्रबन्ध व्यवस्था उस जमाने में भी एक आर्कषण का केन्द्र थी। शहर के बिचो बिच स्थित यह तालाब है इसमे पानी आगमन का तकनिकी तरीका उस जमाने मे ंभी बेहतर एंव उत्तम किस्म का था। चंूकी खेतडी अरावली की पहाडीयो से घिरा हुए है इसलिए यहा के राजाओं एवं शेठ शाहुकारो ने इस तालाब के लिए पक्की नहरे बनवाई हुई थी पहाडियों से आने वाला पानी अब अतिक्रमण की वजह से इस तालाब तक नही पहुच पाता है। एक नहर चांदमारी के बाध से वालब द्वारा इस तालाब में पानी पहुचाने का कार्य करती थी वही जो कुछ खुली एंव कुछ ढकी हुई नहर थी यहनहर पहाडीयो से होकर आती थी।
खेतडी के पन्नाशाह तालाब कलाकृती एव भव्यता का बेजोड नमुना है और साथ ही इसकी जल प्रबन्ध व्यवस्था उस जमाने में भी एक आर्कषण का केन्द्र थी। शहर के बिचो बिच स्थित यह तालाब है इसमे पानी आगमन का तकनिकी तरीका उस जमाने मे ंभी बेहतर एंव उत्तम किस्म का था। चंूकी खेतडी अरावली की पहाडीयो से घिरा हुए है इसलिए यहा के राजाओं एवं शेठ शाहुकारो ने इस तालाब के लिए पक्की नहरे बनवाई हुई थी पहाडियों से आने वाला पानी अब अतिक्रमण की वजह से इस तालाब तक नही पहुच पाता है। एक नहर चांदमारी के बाध से वालब द्वारा इस तालाब में पानी पहुचाने का कार्य करती थी वही जो कुछ खुली एंव कुछ ढकी हुई नहर थी यहनहर पहाडीयो से होकर आती थी।
रियासतकालीन में भी था फिल्टर सिस्टम
पन्नाशाह तालाब में नहरो से आने वाला पानी एक फिल्टर सिस्टम से हो कर आता था जो की एक दम स्वच्छ होता था फिल्टर सिस्टम आज भी एक धरोहर के रूप में मौजुद है। लेकिन रखरखाव के चलते वह बंद पडा है। तालाब में ओवरफलो के लिए नगर के बाहर तक पक्की एवं पुख्ता नहर होती थी साथ ही पीतल के वाल्वो द्वारा हरदयाल जी के कुॅए के पास बनी खेळ में पानी आता था जो पशुओं के लिए हर समय भरी रहती थी जिसे अब खत्म कर दिया गया है। अधिकांश जल के श्रोत अब प्राय बन्द के समान है यदि राजस्थान सरकार मुख्यमत्री जल स्वाबलम्बन भोजन के अन्तर्गत खेतडी के इन सभी श्रोतो को पुनजीवित किया जायें साथ ही समय पर इनको देख रेख एव सुव्यवस्थीत तरीके से पुन निर्माण कर इनको काम में लिया जाये तो खेतडी की जल समस्या का समाधान निश्चित रूप से हो सकता है साथ की यहा का तल स्तर स्वत ही उपर उठ जायेगा।
नगरपालिका करवायेगीं जल स्रौतो का जिर्णाद्वार
नगरपालिका क्षेत्र के जल स्रौतो की देखरेख करने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर रही है। चैयरमेन उमराव कुमावत ने बताया कि अभियान के रूप में जितने भी पुराने कुएं, बावडीयों का जिर्णौद्वार करवाया जायेगा। मांदरी गांव में जिला कलैक्टर के साथ सभी विभागो के कर्मचारियों ने इस अभियान की शुरूआत कर दी गई। साथ ही स्कुलो में अभियान चलाकर ग्रामीणो को जागृत किया जायेगा। सामुहिक रूप से श्रमदान करके भी स्रौतो की देखरेख की जायेगी। और नव निर्मित भवन बनाने की अनुमति से पहले बरसाती पानी स्टोरेज टैंक बनवाना अनिर्वाय किया जायेगा।
इनका कहना है-
पन्नाशाह तालाब में नहरो से आने वाला पानी एक फिल्टर सिस्टम से हो कर आता था जो की एक दम स्वच्छ होता था फिल्टर सिस्टम आज भी एक धरोहर के रूप में मौजुद है। लेकिन रखरखाव के चलते वह बंद पडा है। तालाब में ओवरफलो के लिए नगर के बाहर तक पक्की एवं पुख्ता नहर होती थी साथ ही पीतल के वाल्वो द्वारा हरदयाल जी के कुॅए के पास बनी खेळ में पानी आता था जो पशुओं के लिए हर समय भरी रहती थी जिसे अब खत्म कर दिया गया है। अधिकांश जल के श्रोत अब प्राय बन्द के समान है यदि राजस्थान सरकार मुख्यमत्री जल स्वाबलम्बन भोजन के अन्तर्गत खेतडी के इन सभी श्रोतो को पुनजीवित किया जायें साथ ही समय पर इनको देख रेख एव सुव्यवस्थीत तरीके से पुन निर्माण कर इनको काम में लिया जाये तो खेतडी की जल समस्या का समाधान निश्चित रूप से हो सकता है साथ की यहा का तल स्तर स्वत ही उपर उठ जायेगा।
नगरपालिका करवायेगीं जल स्रौतो का जिर्णाद्वार
नगरपालिका क्षेत्र के जल स्रौतो की देखरेख करने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर रही है। चैयरमेन उमराव कुमावत ने बताया कि अभियान के रूप में जितने भी पुराने कुएं, बावडीयों का जिर्णौद्वार करवाया जायेगा। मांदरी गांव में जिला कलैक्टर के साथ सभी विभागो के कर्मचारियों ने इस अभियान की शुरूआत कर दी गई। साथ ही स्कुलो में अभियान चलाकर ग्रामीणो को जागृत किया जायेगा। सामुहिक रूप से श्रमदान करके भी स्रौतो की देखरेख की जायेगी। और नव निर्मित भवन बनाने की अनुमति से पहले बरसाती पानी स्टोरेज टैंक बनवाना अनिर्वाय किया जायेगा।
इनका कहना है-
300 वर्ग फुट व इससे बडे सरकारी कार्यालय में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लागु कर रहे है जिसका राजकीय जयसिंह स्कुल में कार्य प्रगती पर है। 300वर्ग फुट से अधिकनव निर्माण मकानों पर स्वीकृती बारिस का टैंक बनाने की विशेष शर्त के साथ अनुमती दी जाती है।
अनिल जोनवाल
ईओ, नगरपालिका खेतड़ी
अनिल जोनवाल
ईओ, नगरपालिका खेतड़ी
1977 से खेतडी के जल स्रौतो में स्वंय श्रमदान करता हुॅ। अगर खेतडी तालाब की नहरो को अगर पूनजीर्वित किया जाये तो तालाब में पानी आयेगा तथा इससे पर्यटक भी खेतडी आने लगेंगे।
कवि हमीदुउल्ला खॉन, ग्रामीण
कवि हमीदुउल्ला खॉन, ग्रामीण
खेतड़ी में जल समस्या को लेकर मैने शोध किया है पुरा एरीया पहाडी क्षेत्र है अगर बारिश के पानी को स्टोरेज कर रखा जाये तो फ्लोराईड की मात्रा भी कम होगी और जल स्तर भी ऊपर आयेगा। सरकार द्वारा वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लागु करने के पश्चात जल स्तर में काफी सुधार आयेगा।
डा पारस वर्मा
लेखक, खेतडी में जल समस्या और समाधान
डा पारस वर्मा
लेखक, खेतडी में जल समस्या और समाधान
बरसात के दिनो में हजारो बैरल पानी बहकर चला जाता है यदि कोई एनिकट बनाकर इस पानी को रोका जाये तो खेतडी जल के मामले में आत्मनिर्भर हो जायेगी।
सुधिर गुप्ता
उपाध्यक्ष, व्यापार मण्डल
सुधिर गुप्ता
उपाध्यक्ष, व्यापार मण्डल






