जनजाति महिलाओं द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स को देखकर अभिभूत हुई कलक्टर नेहा गिरि
प्रतापगढ़। जिला कलक्टर नेहा गिरि की पहल पर कांठल की लोक संस्कृति एवं जनजीवन पर आधारित मांडणा पेंटिंग्स को बड़े स्केल पर उभारने के लिए की जा रही गतिविधियों के सिलसिले में स्थानीय महिला द्वारा बनाई गई उम्दा पेंटिंग्स को मिनी सचिवालय में एक दीवार का चयन कर उस पर चस्पा किया जाएगा। इन महिलाओं के लिए जून महीने में ललित कला अकादमी की ओर से खास प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा तथा सबसे बेहतर पेंटिंग मुख्यमंत्राी को भेंट की जाएगी। ग्रामीण विकास विभाग एवं राजीविका की ओर से किसान भवन में चल रहे पीपलखूंट व अरनोद ब्लॉक से गठित महिला स्वयं सहायता समूह की चयनित सदस्यांे के प्रशिक्षण शिविर के निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर नेहा गिरि ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बीस दिवसीय प्रशिक्षण इन महिलाओं के लिए खासा उपयोगी साबित होगा और इनकी कला में निखार जाएगा। इस दौरान जिला कलक्टर नेहा गिरि ने शिविर का अवलोकन किया एवं पूरे परिसर को संभागी महिलाओं की कला कृतियों से सजा देखकर अभिभूत हो गईं। उन्होंने सभागियांे से बड़ी ही आत्मीयता से बातचीत की और उनका हौसला बढाते हुए कहा कि कलाकृतियों को विभिन्न विशिष्ट व्यक्तियों तक पहुंचाया जाएगा तथा ललित कला अकादमी के प्रशिक्षण के संभागियों को मानदेय भुगतान भी किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे पूरा मन लगाकर बारीकियां सीखें और अपनी कला में निखार लाएं। यह उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिला सकती है। आयोजकीय रूपरेखा और अब तक के प्रशिक्षणों की जानकारी देते हुए राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक विनोद पानेरी ने बताया कि जिला कलक्टर नेहा गिरि की पहल पर इस जनजाति अंचल की संस्कृृति को कांठल कला के जरिये विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी। इस दौरान राजीविका और बड़ौदा स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से जुडे़ अधिकारी, कर्मचारी, प्रशिक्षणार्थी मौजूद थे। प्रशिक्षण में भाग ले रही करीब 25 महिलाएं कांठल ग्रामीण क्षेत्रा की परम्परागत मांडणा संस्कृति को देश व विदेश में पहचान दिलाने के लिए कैनवास पर कलर व कूंची (ब्रश) की मदद से कलाकृतियां बना रही हैं। राजीविका द्वारा इस पारम्परिक सांस्कृतिक कला को कांठल कला के रूप में विकसित करने के लिए यह दूसरा प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इससे पूर्व 7 दिवसीय प्रशिक्षण बड़ौदा स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में किया गया था।
प्रतापगढ़। जिला कलक्टर नेहा गिरि की पहल पर कांठल की लोक संस्कृति एवं जनजीवन पर आधारित मांडणा पेंटिंग्स को बड़े स्केल पर उभारने के लिए की जा रही गतिविधियों के सिलसिले में स्थानीय महिला द्वारा बनाई गई उम्दा पेंटिंग्स को मिनी सचिवालय में एक दीवार का चयन कर उस पर चस्पा किया जाएगा। इन महिलाओं के लिए जून महीने में ललित कला अकादमी की ओर से खास प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा तथा सबसे बेहतर पेंटिंग मुख्यमंत्राी को भेंट की जाएगी। ग्रामीण विकास विभाग एवं राजीविका की ओर से किसान भवन में चल रहे पीपलखूंट व अरनोद ब्लॉक से गठित महिला स्वयं सहायता समूह की चयनित सदस्यांे के प्रशिक्षण शिविर के निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर नेहा गिरि ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बीस दिवसीय प्रशिक्षण इन महिलाओं के लिए खासा उपयोगी साबित होगा और इनकी कला में निखार जाएगा। इस दौरान जिला कलक्टर नेहा गिरि ने शिविर का अवलोकन किया एवं पूरे परिसर को संभागी महिलाओं की कला कृतियों से सजा देखकर अभिभूत हो गईं। उन्होंने सभागियांे से बड़ी ही आत्मीयता से बातचीत की और उनका हौसला बढाते हुए कहा कि कलाकृतियों को विभिन्न विशिष्ट व्यक्तियों तक पहुंचाया जाएगा तथा ललित कला अकादमी के प्रशिक्षण के संभागियों को मानदेय भुगतान भी किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे पूरा मन लगाकर बारीकियां सीखें और अपनी कला में निखार लाएं। यह उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिला सकती है। आयोजकीय रूपरेखा और अब तक के प्रशिक्षणों की जानकारी देते हुए राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक विनोद पानेरी ने बताया कि जिला कलक्टर नेहा गिरि की पहल पर इस जनजाति अंचल की संस्कृृति को कांठल कला के जरिये विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी। इस दौरान राजीविका और बड़ौदा स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से जुडे़ अधिकारी, कर्मचारी, प्रशिक्षणार्थी मौजूद थे। प्रशिक्षण में भाग ले रही करीब 25 महिलाएं कांठल ग्रामीण क्षेत्रा की परम्परागत मांडणा संस्कृति को देश व विदेश में पहचान दिलाने के लिए कैनवास पर कलर व कूंची (ब्रश) की मदद से कलाकृतियां बना रही हैं। राजीविका द्वारा इस पारम्परिक सांस्कृतिक कला को कांठल कला के रूप में विकसित करने के लिए यह दूसरा प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इससे पूर्व 7 दिवसीय प्रशिक्षण बड़ौदा स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में किया गया था।
