...आखिर अनहोने तूफान से निकल ही आयी बांसवाड़ा में अमन की कश्ती
बांसवाड़ा-अपनी सदियों पुरानी शांत शहर की साख रखने वाले बांसवाड़ा शहर सप्ताह भर के तनाव के बाद अशांति के बवंडर से जिस बेहतर ढंग से बच निकला है वह काबिले तारीफ है। इस सबका श्रेय जहां शहर व जिले की शांतिप्रिय जनता की समझदारी, धैर्य और शांति व सौहार्द्र के संस्कारों को जाता है वही समस्त जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों के प्रयासों व पुलिस तथा प्रशासन की रणनीति को जाता है।
देश-प्रदेश में इस तरह की घटनाओं के आलोक में यदि हम बांसवाड़ा शहर की घटना को देखे तो पाएंगे कि समन्वित प्रयासों से दोनों पक्षों को आमने-सामने होने से रोककर बांसवाड़ा ने किसी भी प्रकार की जनहानि व संभावित बड़े नुकसान को टालकर प्रदेशभर में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
बांसवाड़ा-अपनी सदियों पुरानी शांत शहर की साख रखने वाले बांसवाड़ा शहर सप्ताह भर के तनाव के बाद अशांति के बवंडर से जिस बेहतर ढंग से बच निकला है वह काबिले तारीफ है। इस सबका श्रेय जहां शहर व जिले की शांतिप्रिय जनता की समझदारी, धैर्य और शांति व सौहार्द्र के संस्कारों को जाता है वही समस्त जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों के प्रयासों व पुलिस तथा प्रशासन की रणनीति को जाता है।
देश-प्रदेश में इस तरह की घटनाओं के आलोक में यदि हम बांसवाड़ा शहर की घटना को देखे तो पाएंगे कि समन्वित प्रयासों से दोनों पक्षों को आमने-सामने होने से रोककर बांसवाड़ा ने किसी भी प्रकार की जनहानि व संभावित बड़े नुकसान को टालकर प्रदेशभर में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राई सी रार को अशांति का पहाड़ बनने से रोका:
शहर में 11 मई की रात्रि युवाओं के बीच हुई तकरार के बाद पत्थरबाजी तथा इसके बाद दोनों समुदायों द्वारा पथराव और आगजनी की घटना को पुलिस बल तैनात करते हुए तथा डीएम-एसपी ने मौके पर पहुंच कर दोनों के बीच टकराव को रोकने का जो प्रयास किया वह इस तकरात को अशांति का पहाड़ बनाने से रोकने मे कामयाब रहा। यदि दोनों पक्षों को समय रहते रोका नहीं जाता तो जनहानि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था।
अफवाहों की चिंगारियों पर लगाया असरकारी अंकुश:
अफवाह की एक छोटी सी चिंगारी अमन के हरे भरे अरण्य में पलभर में राख कर सकती है, इसी आशंका को जिला प्रशासन को बेहतर ढंग से अनुभूत किया और चंद घंटों मंे ही जिलेभर की इंटरनेट सेवाआंे को प्रतिबंधित करते हुए न सिर्फ शहर अपितु पूरे जिले को अशांति की आग से सुरक्षित कर दिया। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट भगवतीप्रसाद ने जिलेभर में 12 से 21 मई तक इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित करते हुए शहर की इस आग को गांव-कस्बों तक फैलने से रोकने के सफल प्रयास किए। पुलिस व प्रशासन का मानना था कि ऐसी स्थितियों में कि जब शहर से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित त्रिपुरा सुंदरी तीर्थ पर हजारों की संख्या में वागड़ अंचल के श्रद्धालु मौजूद थे, कोई एक उपद्रवी भी हजारों के लिए हानि का कारण बन सकता था। शहर की चिंगारी को इस धार्मिक स्थान पर मौजूद हजारों तथा जिलेभर में मौजूद लाखों लोगों के बीच फैलाकर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टालने की दृष्टि से शहर की अशांति के बीच सोशल साईटों पर फैल रही अफवाहों के बवंडर को टालना जरूरी था और यह एकमात्र इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध के माध्यम से ही संभव था। ं
अमन के प्रतिनिधियों ने जगाई सुरक्षा की आस:
शहर में शांति बहाली की कोशिशों में हमारे जनप्रतिनिधियों ने अमन के प्रतिनिधियों की भूमिका निभाई और दिनरात एक करते हुए शहर व जिले की जनता-जनार्दन में सुरक्षा की आस जगाई। प्रदेश के ग्रामीण विकास, पंचायती राज, संसदीय मामलात और निर्वाचन विभाग के राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने संपूर्ण अवधि में मौके पर ही रहते, अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय भ्रमण करते हुए तथा दोनों समुदायों के साथ संवाद स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाते हुए जहां अमन बहाली के प्रयास किए वहीं जिले के प्रभारी व प्रदेश के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी व भूजल विभाग के राज्यमंत्री सुशील कटारा ने पहले दिन से ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से दूरभाष पर सतत संपर्क तथा दो दिनों तक शहर में अपनी मौजूदगी व प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए शांति बहाली के प्रयासों को संबल प्रदान किया। इसके साथ ही संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर, पूर्व राज्यमंत्री भवानी जोशी, बागीदौरा विधायक महेन्द्रजीतसिंह मालवीया, गढ़ी विधायक जीतमल खांट, नगरपरिषद सभापति मंजूबाला पुरोहित सहित जिले के अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों, दोनों प्र्रमुख राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने प्रभावित क्षेत्रों में वक्त जरूरत अपनी उपस्थिति से बड़ा सहयोग प्रदान किया।
...ताकि शहर ले सकें चैन की नींद:
शहर में अशांति की चिंगारी लगते ही मौके पर पहुंचे उदयपुर आईजी आनंद श्रीवास्तव, जिला कलक्टर भगवतीप्रसाद, जिला पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने करीब सप्ताहभर तक मौके पर ही दिनरात गुजारते हुए शहर को चैन की नींद की सौगात दी। दूसरी ओर शांति बहाली के साथ पीडि़तों को राहत दिलवाने के लिए निर्देशन प्रदान करने पहुंचे संभागीय आयुक्त ने भी पांच दिनों तक यहां मौजूद रहे। इसके साथ ही उदयपुर संभाग के विभिन्न स्थानों से पहुंचे लगभग एक दर्जन राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों व जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने जहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट्स के रूप में दिन-रात अपनी ड्यूटी दी वहीं एमबीसी, क्यूआरटी तथा पुलिसकर्मियों के साथ जिले के राजस्वकर्मियों ने भी चप्पे-चप्पे पर नज़र रखते हुए शांति बहालों के प्रयासों को सफल बनाया। दूसरी तरफ अतिरिक्त जिला कलक्टर हिम्मतसिंह बारहठ के निर्देशन में विभिन्न विभागीय अधिकारियों, कलेक्ट्रेट के विभिन्न प्रभागों के कर्मचारियों ने जहां दिनरात ऑफिस में ही गुजारते हुए ऑफिस को ही डाईनिंग रूम और ऑफिस को ही बेडरूम बनाते हुए सरकार की शांति बहाली की प्रतिबद्धता को साकार रूप प्रदान किया।
विवाद का किया स्थायी समाधान:
प्रशसन व पुलिस ने जहां अशांति को रोकने के लिए हरसंभव पहल की वहीं लंबे समय से आ रहे विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए तथा दोनों पक्षों को विश्वास में लेते हुए विवादित स्थान को हटाकर अनोखा कार्य किया। इसी प्रकार धार्मिक जुलूसों में हथियारों के प्रदर्शन की होड़ को रोकने की दृष्टि से शांति समिति की बैठक में सभी प्रबुद्धजनों की मौजूदगी और सहमति पर सभी प्रकार के जुलूसों में हथियारों के प्रदर्शन को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया। प्रशासन के इस प्रयास की जिलेभर में सराहना की जा रही है।
पीडि़तों को राहत, पुनर्वास के प्रयास:
प्रशासन द्वारा शांति स्थापना के साथ ही पीडि़तों को राहत देने और उनके पुनर्वास की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रशासन ने राजस्वकर्मियों की सर्वे टीमों का गठन करते हुए प्रभावित क्षेत्र के हर घर की सर्वे करवाई गई और हुए 89 संपत्तियों के नुकसान का अनुमान लगाया गया। प्रशासन ने करीब 1 करोड़ 81 लाख रुपयों के नुकसान की जानकारी संकलित करते हुए त्व्रित राहत के रूप में 30.60 लाख रुपयों की स्वीकृति दी गई। दूसरी ओर घटना के दौरान पीडि़तों की आवास, भोजन, पेयजल तथा अन्य समस्त आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराने के साथ ही कर्फ्यू प्रभावित क्षेत्रों तक राशन सामग्री पहुंचाने के हरसंभव प्रयास किये गये।
शहर में शांति बहाली की कोशिशों में हमारे जनप्रतिनिधियों ने अमन के प्रतिनिधियों की भूमिका निभाई और दिनरात एक करते हुए शहर व जिले की जनता-जनार्दन में सुरक्षा की आस जगाई। प्रदेश के ग्रामीण विकास, पंचायती राज, संसदीय मामलात और निर्वाचन विभाग के राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने संपूर्ण अवधि में मौके पर ही रहते, अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय भ्रमण करते हुए तथा दोनों समुदायों के साथ संवाद स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाते हुए जहां अमन बहाली के प्रयास किए वहीं जिले के प्रभारी व प्रदेश के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी व भूजल विभाग के राज्यमंत्री सुशील कटारा ने पहले दिन से ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से दूरभाष पर सतत संपर्क तथा दो दिनों तक शहर में अपनी मौजूदगी व प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए शांति बहाली के प्रयासों को संबल प्रदान किया। इसके साथ ही संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर, पूर्व राज्यमंत्री भवानी जोशी, बागीदौरा विधायक महेन्द्रजीतसिंह मालवीया, गढ़ी विधायक जीतमल खांट, नगरपरिषद सभापति मंजूबाला पुरोहित सहित जिले के अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों, दोनों प्र्रमुख राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने प्रभावित क्षेत्रों में वक्त जरूरत अपनी उपस्थिति से बड़ा सहयोग प्रदान किया।
...ताकि शहर ले सकें चैन की नींद:
शहर में अशांति की चिंगारी लगते ही मौके पर पहुंचे उदयपुर आईजी आनंद श्रीवास्तव, जिला कलक्टर भगवतीप्रसाद, जिला पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने करीब सप्ताहभर तक मौके पर ही दिनरात गुजारते हुए शहर को चैन की नींद की सौगात दी। दूसरी ओर शांति बहाली के साथ पीडि़तों को राहत दिलवाने के लिए निर्देशन प्रदान करने पहुंचे संभागीय आयुक्त ने भी पांच दिनों तक यहां मौजूद रहे। इसके साथ ही उदयपुर संभाग के विभिन्न स्थानों से पहुंचे लगभग एक दर्जन राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों व जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने जहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट्स के रूप में दिन-रात अपनी ड्यूटी दी वहीं एमबीसी, क्यूआरटी तथा पुलिसकर्मियों के साथ जिले के राजस्वकर्मियों ने भी चप्पे-चप्पे पर नज़र रखते हुए शांति बहालों के प्रयासों को सफल बनाया। दूसरी तरफ अतिरिक्त जिला कलक्टर हिम्मतसिंह बारहठ के निर्देशन में विभिन्न विभागीय अधिकारियों, कलेक्ट्रेट के विभिन्न प्रभागों के कर्मचारियों ने जहां दिनरात ऑफिस में ही गुजारते हुए ऑफिस को ही डाईनिंग रूम और ऑफिस को ही बेडरूम बनाते हुए सरकार की शांति बहाली की प्रतिबद्धता को साकार रूप प्रदान किया।
विवाद का किया स्थायी समाधान:
प्रशसन व पुलिस ने जहां अशांति को रोकने के लिए हरसंभव पहल की वहीं लंबे समय से आ रहे विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए तथा दोनों पक्षों को विश्वास में लेते हुए विवादित स्थान को हटाकर अनोखा कार्य किया। इसी प्रकार धार्मिक जुलूसों में हथियारों के प्रदर्शन की होड़ को रोकने की दृष्टि से शांति समिति की बैठक में सभी प्रबुद्धजनों की मौजूदगी और सहमति पर सभी प्रकार के जुलूसों में हथियारों के प्रदर्शन को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया। प्रशासन के इस प्रयास की जिलेभर में सराहना की जा रही है।
पीडि़तों को राहत, पुनर्वास के प्रयास:
प्रशासन द्वारा शांति स्थापना के साथ ही पीडि़तों को राहत देने और उनके पुनर्वास की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रशासन ने राजस्वकर्मियों की सर्वे टीमों का गठन करते हुए प्रभावित क्षेत्र के हर घर की सर्वे करवाई गई और हुए 89 संपत्तियों के नुकसान का अनुमान लगाया गया। प्रशासन ने करीब 1 करोड़ 81 लाख रुपयों के नुकसान की जानकारी संकलित करते हुए त्व्रित राहत के रूप में 30.60 लाख रुपयों की स्वीकृति दी गई। दूसरी ओर घटना के दौरान पीडि़तों की आवास, भोजन, पेयजल तथा अन्य समस्त आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराने के साथ ही कर्फ्यू प्रभावित क्षेत्रों तक राशन सामग्री पहुंचाने के हरसंभव प्रयास किये गये।


