बचपन में ही रोप रहे उन्नत कृषि के बीज
नन्हे-मुन्नों को ले कर आ रहे अभिभावक, महिलाएं भी नहीं पीछे

कोटा के बिनायका गांव से किसान गिरिराज
ग्राम कोटा में आए तो अपने पुत्र पुलकित को भी साथ लाए। पुलकित का कहना था
कि उन्हें यहां नए डिजायन के टेक्टर एवं खेती के उपकरण पसंद आए। पिता
गिरिराज ने बताया कि जयपुर में आयोजित ग्राम में जाने की भी बालक ने जिद की
थी, वो पूरा नहीं कर पाए तो उसेे लेकर आए हैं। स्कूल कॉलेज की छात्राएं भी
यहां फिष एक्वेरियम, पषुओं के मॉडल, नर्सरी एवं विभिन्न नवाचारों से रूबरू
हो रहे हैं एवं इनके साथ सैल्फी भी ले रहे हैं।
ग्राम कोटा सभी
के मन भा रहा है। महिला काष्तकार गांवों से आ रही हैं, वहीं अन्य देहात व
शहरी इलाकों से भी महिलाएं यहां रुचिपूर्वक भाग ले रही हैं।
ग्राम
कोटा में जाजम चौपाल में भाग ले कर तथा स्मार्ट फार्म देखकर निकली बूंदी
के जखाना गांव की कृषक राममूर्ति ने ग्राम आयोजन के बारे में पूछने पर
सरकार के इस कदम की सराहना की और कहा कि ‘अस्यां तो पहली बार देेख्यां छ।’
उनकेे साथ आईं मनभर, भूलीबाई और रूपाबाई ने बताया कि उन्होंने यहां वर्मी
कम्पोस्ट के फायदे जाने और वे इसका इस्तेमाल शुरू करेंगी। कोटा के
रामगंजमंडी की मंजू रानी ने कहा कि किसानों के लिए इतना बडा आयोजन करना इस
बात का प्रमाण है कि सरकार को किसानों की फिक्र है। झालावाड के नागोनिया
गांव से आई अनीता एवं जसोदा ग्राम में हर जगह घूमीं और कहा कि यहां बहुत
कुछ है किसानों के लिए। यदि हम इन सब को अपनाएं तो बहुत लाभ मिल सकता है।
खेती को संवारने की चाह में उत्साह से आया दिव्यांग प्रेम
‘ग्राम
कोटा’ के बारे में जिज्ञासा तो काफी पहले ही जाग चुकी थी और इसमें भाग
लेेने का अवसर मिला तो दिव्यांग प्रेम कुमार की खुषी का ठिकाना नहीं रहा।
झालावाड के मनोहरथाना निवासी दिव्यांग प्रेम ने बैसाखी के सहारे ही ग्राम
कोटा का भ्रमण व अवलोकन किया। उन्हांेने कहा कि वे दिव्यांग होने के कारण
खुद कृषि कार्य नहीं कर पाते लेकिन उनके भाई खेती करते हैं, उन्हें तथा
गांव वालों को वे यहां सीखी जानकारियां देंगे ताकि उनकी कृषि भी उन्नत हो
सके, ज्यादा आमदनी हो सके।
प्रेम ने कहा कि नई नई किस्मों की खेती, रासायनिक खादों के नुकसान, बीमारियांे से बचाव के उपायों की जानकारी उन्हें यहां से मिली।