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अंधेरे से उजाले तक: गौतम मोरारका का रोशनी अभियान – 130वाँ नेत्र शिविर, उम्मीद का नया सवेरा



नवलगढ़, राजस्थान।

26 नवंबर को सेवा ज्योति आर. आर. मोरारका चैरिटेबल ट्रस्ट फिर एक बार वह काम करने जा रहा है, जिसे शब्दों में नहीं… लोगों की चमकती आँखों में पढ़ा जाता है। ट्रस्ट अपना 130वां विशाल निशुल्क नेत्र लेंस प्रत्यारोपण शिविर आयोजित कर रहा है—एक ऐसा शिविर, जहाँ इलाज नहीं, आशाएँ लौटाई जाती हैं।


इस दिन सैकड़ों लोग आएँगे—किसी की दुनिया धुंधली है, कोई रंगों को भूल चुका है… पर लौटेंगे ज़रूर; अपनी आँखों में नई कहानी, नई रौशनी लेकर। प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मोतियाबिंद और अन्य नेत्र रोगों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज करेगी।


“हर किसी को सुन्दर दुनिया देखने का अधिकार है।”

– गौतम आर. मोरारका

“Everyone deserves the right to see the beauty of this world. Even a small effort can change someone’s life.”

— Gautam R. Morarka,

गौतम आर. मोरारका, जो एक सफल उद्योगपति होने के साथ-साथ समाजसेवा का अनोखा जुनून रखते हैं, अपने इस ट्रस्ट को सिर्फ संस्था नहीं—एक "देश की आँखें" मानते हैं।

द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के संस्थापक होने के बावजूद, उन्हें सबसे अधिक संतोष तब मिलता है जब किसी बुजुर्ग की आंखों में रौशनी आने  बाद पहली बार मुस्कान आती है।


उनके अनुसार—

“अगर किसी एक की रौशनी लौटती है, तो समझिए हमारी दुनिया थोड़ी और उजली हो गई।”

सेवा की डोर से जुड़े लोग



ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी संजय शर्मा  बताते हैं—


“यह सिर्फ शिविर नहीं… एक निरंतर यात्रा है। हर महीने , हर शिविर, कई  लोगों के जीवन में उजाला बनकर आता है।”

ट्रस्ट की टीम सिर्फ इलाज नहीं करती—वे लोगों में विश्वास जगाते हैं कि दुनिया की खूबसूरती उनके लिए भी है।

समाज को देने वाली एक रौशनी

यह पहल एक सबक भी है—

कि जब इच्छाशक्ति और करुणा मिल जाती है तो बदलाव असंभव नहीं रहता।

गौतम आर. मोरारका और उनकी टीम साबित कर रही है कि सेवा सिर्फ दान नहीं—यह संवेदना की वह लौ है, जो दूसरों की ज़िंदगी में उजाला बनकर जलती है।