सरकार द्वारा लिखित में किये गये समझौते लागू नहीं करना सरकार की बड़ी भूल है: शर्मा

खबर - पंकज पोरवाल 
यात्री हुए परेशान, रात 12 बजे से थमे भीलवाड़ा डिपो की 108 बसों के चक्के,
भीलवाड़ा । प्रदेश सरकार की रोडवेज विरोधी नितियों के विरोध में भीलवाड़ा आगार के कर्मचारी रात 12 बजे से हड़ताल पर चले गऐ। इसके चलते जिले में संचालित सभी 108 बसों के चक्के थम गये। बसें बंद रहने से हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यात्रियों को मनमाना किराया देकर निजी बसों में यात्रा करने को विवश होना पड़ रहा है। बताया जाता है कि भीलवाड़ा आगार से प्रतिदिन 98 रुटों पर 108 बसों का संचालन होता है। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते  रात 12 बजे से इन सभी रूटों पर सभी 108 बसों के पहिये थम गये। इसके अलावा बाहर से भी बसें नहीं आ रही है। रात बारह बजे से  पहले गंतव्य के लिए रवाना हुई बसें ही यहां पहुंची है, जिन्हें बाहर से ही रवाना किया गया। उधर, औसतन इन रोडवेज बसों में प्रतिदिन 19 से 20 हजार यात्री सफर करते हैं, जो आज हड़ताल के चलते परेशान नजर आये। बसें नहीं चलने से यात्रियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सैकड़ों यात्री आज सवेरे बस स्टेण्ड पहुंचे तो उन्हें हड़ताल के बारे में जानकारी मिली जिससे वे खासे परेशान नजर आए और वहां से उन्हें लौटना पड़ा। वहीं कई ऐसे यात्री हैं जो कि बसों के नहीं चलने से अपने गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंच पाए। मजबूरन यात्रियों को निजी बसों में मनमाना किराया देकर सफर करने को विवश होना पड़ा। वहीं दूसरी और भीलवाड़ा आगार के संयुक्त मोर्चा सचिव मनोहरलाल शर्मा ने कहा कि गत 27 जुलाई को हुये लिखित समझौते के अनुरुप क्रियान्विती के आदेश नहीं करने और एप्लीमेंट्स में कमेटी का समय आगे बढ़ाने और मजदूरों के साथ धोखा करने के कारण रोडवेज मजदूर चक्का जाम हड़ताल कर रहे हैं। आज शाम तक राज्य सरकार द्वारा कुछ किया गया तो ठीक, अन्यथा प्रदेश के निर्णय के अनुसार इस हड़ताल को आगे बढ़ाया भी जा सकता है। सरकार द्वारा लिखित में किये गये समझौते लागू नहीं करना सरकार की बड़ी भूल है, वो अपने स्वयं के वेतनभत्ते बढ़ाने के लिए दो सैकंड नहीं लगाती है। सरकार मजदूरों को मिलने वाले हक के लिए बार-बार मजदूरों का गला दबा रही है। सरकार वाह-वाही लूट रही है। वसुंधरा राजे को अपनी यात्रा निकालने से फुर्सत नहीं है, आमजन त्रस्त है व सभी विभाग परेशान हो रहे हैं। रोडवेज को खुर्दबुर्द कर धन्ना सेठों को देने की तैयारी साढ़े चार साल से चल रही है, वो, बार-बार धरना प्रदर्शन करने को मजबूर कर रहे हैं। सरकार लिखित समझौते को लागू करती है तो अभी हम हड़ताल समाप्त करने को तैयार है। हालांकि रोडवेज कर्मियों के संयुक्त फेडरेशन ने यात्रियों को होने वाली परेशानी के लिए माफी मांगी है लेकिन संयुक्त फेडरेशन के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि चक्काजाम करना रोडवेज कर्मियों की मजबूरी है। राज्य सरकार रोडवेज कर्मियों की मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है जिसकी वजह से इस तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं। पूर्व में भी 2 दिनों तक संयुक्त फेडरेशन के बैनर तले रोडवेज का चक्काजाम किया था उसके बाद भी सरकार टस से मस नहीं हुई। ऐसे में एक बार फिर रोडवेज कर्मियों ने चक्काजाम किया है। अब सरकार इसके बाद अगला कदम क्या उठाती है। 

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