ऐसा क्या हो रहा है दातारामगढ़ में जो लिखनी पड़ी इतनी कड़वी बात


दातारामगढ़ की सच्चाई राजेश वैष्णव की कलम से 
किसको सुनाये  कौन सुनेगा
*दांतारामगढ़ में टूट चुका रूठ चुका विकास, अब इलाज को तरस रहा है विकास*
*परिवारजनो को सता रही अपने स्वास्थ्य की चिंता*
दांतारामगढ़ । देश में विकास के टूट  फुट जाने की बात की जा रही है लेकिन लगता है दांतारामगढ़ से विकास रूठ भी गया है और विकास इतना रूठ गया इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि विकास को सलामत बताने के लिए दांता में करीब दो-अढ़ाई साल पहले बने गौरव पथ का लोकार्पण करवाकर जनता के बीच भुनाने का प्रयास किया जहां गौरव पथ जगह जगह से टूट चुका वहीं गौरव पथ पर चलकर कईयो की  जुतियां टूट गई और वाहन चालको ने टायर तक बदलवा लिए ऐसे में अब दो साल बाद गौरव पथ का लोकार्पण करवाकर नेता जनता को क्या संदेश देना चाहते है यह तो वही जाने लेकिन लेकिन यह जनता है सब जानती है सभी की नब्ज पहचानती है। यहां के नेताओ ने उन कार्यो का लोकार्पण भी करवाए जो काफी पहले हो चुके है। इनमे दांता के सरपंच महोदय भी शामिल रहे सरपंच महोदय व सत्ता पक्ष के नेताओं को उसकी चिंता नहीं है जो जनता भुगत रही है । दांता में मुख्य कस्बे की सडक़ पूरी तरह से टूट चुकी है। यहां तक कि किसी महिला के डिलेवरी होने वाली है उसे दांता कस्बे के बीच से ले जाया जाए तो निश्चित अस्पताल जाने की या दाई की बुलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसा ही हाल दांता के बाहर की सडक़ों का है। रामगढ़ मे तो मैन बस स्टेण्ड पर राजीव गांधी सर्किल पर कई वर्षो से गहरा गढ्ढा है जो विकास के नाखून बराबर भी नहीं। पास में कई बुद्विजीवी व जनप्रतिनिधि बैठते है बड़े अधिकारी तक गड्डे के अंदर से निकलते है। पंचायत समिति की बैठक में भी मामला उठ चुका। प्रधान, उप्रधान से लेकर अनेक सदस्य भी इससे गुजरते है लेकिन उनको भी शायद यह दिखाई नहीं देता। शायद दो साल पुराने लोकार्पण के बजाय इन पर विचार किया होता तो जनता को राहत मिलती।

चलो अब और आगे के विकास की बात करते है कागजो में कॉलेज की मांग सभी दलो के नेता कर रहे है। लेकिन दांतारामगढ़ उपखण्ड मुख्यालय की राजकीय बालिका विद्यालय तक क्रमोन्नत नहीं हो पाई। शिक्षा से ज्यादा स्वास्थ्य आवश्यक होता है। उपखण्ड मुख्यालय के राजकीय आदर्श चिकित्सालय मे डॉक्टर नहीं है। अब इसमें तो विकास भी बेचारा क्या करे एक डॉक्टर लगाया तो दांता व रामगढ़ की रियासत का मामला आ गया। विकास को चाहने वाले ही अड़ गए कि नहीं दांता से डॉक्टर रामगढ़ कैसे जा सकता है जनता से ज्यादा डॉक्टर साहब की सुविधा का ध्यान भी तो रखना था मंत्रीजी के पास पहुंचे और तबादला करवा दिया निरस्त। इसके बाद किसी ने विकास को संभाला तक नहीं न विकास को चाहने वालाा पहुंचा और न ही किसी अन्य ने अस्पताल पहुंचकर विकास के साथ बीमार पड़े अस्पताल की सुध ली। सुध लेने वाले भी अब क्या करे उनका सोचना भी ठीक है कि हम स्वस्थ रहेगे तो विकास रहेगा अन्यथा वह किसी दूसरे के गोद चला जाएगा इसलिए विकास को चाहने वाले अपना स्वास्थ्य सुधारने में लगे है दांतारामगढ़ स्वस्थ्य मिशन अीिायान चलाया जा रहा है। उपखण्ड मुख्यालय के अस्पताल आने वाले तीन सौ मरीजो की चिंता छोड़ गांव गांव में जाकर सौ पचास मरीजो का स्वास्थ ठीक किया जा रहा है ताकि समय आने पर वे उनको ब्लड डोनेट कर सके। विकास के अधिकांश परिवार वाले भामाशाह में अपना नाम जुडवाने के लिए चक्कर काट रहे है शायद नाम जुडने के बाद उनको भी सुविधाओं का लाभ मिल जाए। इसमे भी पार्टी ने यह तय कर रखा है कि बीपीएल में जिसके ज्यादा नम्बर आएगे उसी को कार्ड मिल पाएगा इसलिए विकास जाएग भाड़ में सभी में अपने अपने नम्बर बढ़ाने की होड मची है।

अब विकास के परिवार वालो की भी सुनिए कि हमे आप उल्हाना कैसे दे सकते है हमने विकास को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा रखा है, सरकारी जॉच व सरकारी दवाएं दी जा रही है। लेकिन यह सुविधाए तो सभी सामान्य मरीजो को मिल रही है। विकास के लिए आपने अलग से क्या किया उसे गंभीर रोग है जयपुर व दिल्ली में जोकर उसका चैकअप करवाना चाहिए। या फिर उन्हे भी अपना स्वास्थ्य सुधारने के बजाय विकास के साथ ही भर्ती हो जाना चाहिए लेकिन ऐसा किया तो आका उनका भामाशाह सूची मेें से नाम ही हटा देगें। ख्ैार अब बिल्कुल चुप विकास को भी ज्यादा बोलने व सुनने से मना किया है और उनके परिवार वालो का स्वास्थ्य भी ज्यादा सुनने से बिगड़ सकता है।

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