गहलोत ने दिया फिर अपनी दृढ़ प्रशासनिक क्षमता और सुझबुझ का परिचय

खबर - प्रशांत गौड़ 
-किसानों के 2 लाख तक के ऋण माफ
-छोटे मझौले किसानों के होंगे सम्पूर्ण ऋणमाफ
-बैंकों को भी अनिश्चतता के घेरे से बाहर निकाला
जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शायद यू ही जादूगर नहीं कहा जाता है। उनके बातों में ही जादू नहीं बल्कि उनके निणर्यों में भी राजनीतिक कौशल झलकता है। मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने बुधवार को अपनी सरकार के सबसे बड़े फैसले का श्री गणेश करते हुए किसानों की सम्पूर्ण कर्जमाफी की तरफ पहला कदम बढ़ा दिया है। उन्होंने शुरूआत में 2 लाख तक के ऋण माफ करने की घोषणा की जिससे सरकार पर 18हजार करोड़ का भार पडेगा।
मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ के बाद सबकी निगाहें राजस्थान में थी। अकाल, कर्ज का मर्ज और खराब वित्तीय हालात से जूझते राजस्थान में ऐसे बड़े निर्णय लेना आसान नहीं है। ऐसे में यह मामला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कम बड़ी अग्निपरीक्षा नहीं था लेकिन विपक्ष को कोई बड़ा मौका देने से रोकने के लिए और जरूरतमंद छोटे, मझौले किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने अपनी कट्बिद्धता दर्शाई है हालांकि हय निर्णय कितना सफल होता है यह किसानों के ऋण माफी पत्रों के वितरण से पता चलेगा।
तीन दिन तक चला मंथन:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इतना बड़ा कदम उठाने से पहले करीब तीन दिन तक अधिकारियों से मंथन किया। सम्पूर्ण कर्जमाफी करना सरकर के लिए संभव नहीं था ऐसे में बड़ी फौरी राहत देना जरूरी था। लोकसभा चुनाव को देखते हुए राज्य सरकार इसमें डिले भी नहीं कर सकती थी ऐसे में अब इस राशि को जुटा पाना और बैंकों को भी सहयोग दे पाना सरकार के लिए आसान होगा।
दो बड़े बात इस फैसले की
इस कर्जमाफी में जहां सहकारी और सरकारी बैंकों से लिया गया सम्पर्ण ऋण माफ होगा जिस तरफ सरकार ने एक प्रस्ताव बनाकर रुपरेखा तय की है तो कॉओपरेटिव बैंक का सम्पर्ण कर्ज की बजाए अभी दो लाख तक के ऋण माफ होंगे ऐसे में बड़े किसान जो बड़ी जरूरत के लिए ऋण लेते है जिनमें उनके टैक्ट्रर के अलावा उनकी गाडिय़ां भी शामिल होती है उस पर सरकार ने ध्यान देते हुए इसका पहले पूरा लाभ छोटे, मध्यम श्रेणी के किसानों को देने की कोशिश की है ताकि उनको कर्ज माफ होने से उनको बड़ी राहत मिल जाए।
बैंकों को बड़ी राहत: गहलोत सरकार ने अपने फैसले से सबसे बड़ी राहत बैंकों को दी है। कॉपरेटिव बैंको में बड़े किसानों को बड़ा ऋण लिया है जो कई ऋण तो किसानों का 50 लाख से ज्यादा है। ऐसे में इसकी भरपाई कर पाना सरकार के लिए संभव नहीं था दूसरी बात इसमें यह भी आती है कि यह ऋण कृषक लोन योजना के तहत निजी जरूरतों के लिए लिया गया। अब दो लाख तक के ऋण मसौदा तय होने के कारण ऐसे किसान इसका फायदा नहीं उठा सकेंगे। वहीं सरकार ऋण माफ करने से पहले कुछ नियम भी तय कर सकती है।  ऐसे में सरकार के ऐसे फैसले को लागू करने से बैंकों की आर्थिक हालात खस्ता होती है अब सरकारक े इस मास्टर स्ट्रोक से उनको राहत मिली है।

Share This