शहीदों का सम्मान समाज का दायित्व

खबर - अजय कुमार 
सियाचिन ग्लेशियर में 2011 में आॅपरेशन मेघदूत में शहीद हुए घांघू के राजेश फगेड़िया की पुण्यतिथि पर ग्रामीणों ने दी पुष्पांजलि
चूरू। सियाचिन ग्लेशियर में तैनाती के दौरान 2011 में आॅपरेशन मेघदूत में शहीद हुए राजेश फगेड़िया की आठवीं पुण्य तिथि पर सोमवार को घांघू में उनके स्मारक पर एकत्र होकर ग्रामीणों ने श्रद्धांजली अर्पित की। इस मौके पर ग्रामीणों ने शहीद राजेश को कृतज्ञता के साथ याद किया और कहा कि शहादत का सम्मान प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। 
इस मौके पर पूर्व सरपंच लक्ष्मीनारायण जांगिड़ ने कहा कि देश की सीमा पर बलिदान होने वाले किसी परिवार या जाति विशेष के व्यक्ति नहीं होते, अपितु संपूर्ण राष्ट्र के सपूत होते हैं। उन्होंने कहा कि राजेश ने देश के लिए कुर्बान होकर हम सभी का मान बढ़ाया है और हमें उनकी शहादत पर गर्व है। 
पूर्व सरपंच नाथी देवी नेहरा ने कहा कि आज जब देश की रक्षा के पाकिस्तान और चीन जैसे शत्रु लगातार खतरा बने हुए हैं और शांतिकाल में भी जवान शहीद हो रहे हैं, ऐसे में राजेश जैसे देशभक्त माइनस 35-40 डिग्री तापमान पर भी कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हुए मातृभूमि की रक्षा में तैनात रहते हैं। यह हमारे जवानों  का पराक्रम ही है  कि हम यहां खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। 
साहित्य अकादेमी के युवा अवार्डी राजस्थानी लेखक कुमार अजय ने कहा कि जाति और धर्म के भेद जैसी तुच्छ बातों से ऊपर उठे बिना शहीदों के सम्मान की बात व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों का यह दायित्व है कि जिन चीजों के लिए सैनिक लड़ता है, क्या हम देश के भीतर रहकर उनकी रक्षा के बारे में सोचते हैं। जातिवाद, सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार और अंधविश्वास से यदि हम मुक्त नहीं होते हैं तो फिर हम वीरों की शहादत का अपमान ही कर रहे हैं। 
इस दौरान स्कूली बालिकाओं ने शहीद राजेश अमर रहे और भारत माता के जयकारों के साथ गांव में प्रभात फेरी निकाली और देशभक्ति रचनाएं प्रस्तुत कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर ग्रामीणों ने इस बात पर रोष भी व्यक्त किया कि राजेश की शहादत को इतना समय बीत जाने के बावजूद गांव के स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर नहीं किया गया है। 
इस दौरान शहीद के पिता रामलाल फगेड़िया, माता शारदा देवी, वीरांगना मधु, पुत्र देवेन व मयंक, बहिन अंजू, सरजीत मांझू, ग्राम सेवा सहकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष परमेश्वर लाल दर्जी, पूर्व सैनिक लालचंद फगेड़िया, सरजीत मांझू,  प्यारेलाल फगेड़िया, सुरजीत सिंह राठौड़, सुखलाल सिहाग, पतराम ढाका, पूर्व सैनिक सांवर मल रेवाड़, लिखमाराम नोखवाल, गिरधारीलाल बरड़, गुमानाराम मांझू, हेमराज फगेड़िया, बीरबल नोखवाल, विजेंद्र सिहाग, इरफान पहाड़ियान, सौरभ नेहरा, विद्यालय प्रधानाध्यापिका सरोज, मुरारीलाल दर्जी, मोहन लाल फगेड़िया, सुधीर गुप्ता, अजय जांगिड़, शिशपाल फगेड़िया, दुलाराम ढाका, रामनिवास कपूरिया, दाउद अली व्यापारी, केशरदेव गुरी, विशाल दर्जी, हनुमान प्रजापत, ईश्वर राम बरड़, गिरधारी लाल बरड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। 


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