बेणेश्वर मुख्य मेले में इस बार बड़ा बदलाव

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शहीदों के सम्मान में परम्पराओं का होगा सादगीपूर्ण निर्वहन,
बेणेश्वर पीठाधीश्वर पालकी त्याग कर पदयात्रा करते हुए पहुंचेंगे बेणेश्वर,
संगम में शाही की बजाय होगा सादगीपूर्ण माघी स्नान,
दीप जलाकर दी जाएगी शहीदों को श्रद्धान्जलि
साबला-बेणेश्वर- पुलवामा के शहीदों के प्रति सम्मान अभिव्यक्ति और श्रद्धान्जलि स्वरूप इस बार मंगलवार को माघ पूर्णिमा पर बेणेश्वर मुख्य मेले की विभिन्न परम्परागत रस्मों में सादगी झलकेगी। बेणेश्वर धाम के सदियों पुराने इतिहास में ऎसा बदलाव पहली बार देखा जाएगा।  इस बारे में बेणेश्वर धाम के पीठाधीश्वर गोस्वामी अच्युतानंद महाराज एवं माव भक्तों ने अहम् फैसले लिए हैं। इसके अनुसार मेले की परंपरागत रस्माें का निर्वाह पूरी सादगी से किया जाएगा। तय की गई रूपरेखा के अनुसार माघ पूर्णिमा पर बेणेश्वर पीठाधीश्वर मंगलवार को साबला से बेणेश्वर पहुंचने वाली परंपरागत पालकी यात्रा में पालकी मेें नहीं बैठकर हजारों श्रद्धालुओं के साथ पैदल ही जाएंगे। इसके बाद बेणेश्वर जलसंगम तीर्थ में परम्परागत महन्तश्री का परंपरागत शाही स्नान न होकर इसे माघी स्नान के रूप में लिया जाकर स्नान परंपराओं का सादगीपूर्ण ढंग से निर्वहन किया जाएगा। बेणेश्वर पीठाधीश्वर द्वारा माघी स्नान के दौरान पुलवामा शहीदों की स्मृति में संगम जल में जलान्जलि अर्पण करने का अनुष्ठान भी किया जाएगा। बेणेश्वर पीठाधीश्वर गोस्वामी अच्यतुतानंद महाराज ने सोमवार को साबला हरि मन्दिर में नियमित सत्संग के दौरान बताया कि पुलवामा की घटना को लेकर देश आहत है और यह समय शहीदों के प्रति सम्मान और श्रद्धान्जलि व्यक्त करने का है। ऎसे में बेणेश्वर मेले की परम्पराओं का पूरी सादगी के साथ निर्वहन किया जाएगा।

शहीदों के नाम दीप श्रृंखला

उन्होंने बेणेश्वर धाम पहुंचने वाले सभी भक्तों व मेलार्थियों से आग्रह किया है कि वे माघ पूर्णिमा, मंगलवार की साँझ बेणेश्वर धाम के संगम जल तीर्थ व क्षेत्र में शहीदों को श्रद्धान्जलि अर्पित करने के लिए कम से कम एक-एक दीया जरूर लगाएं। उन्होंने कहा कि पूज्य संतश्री मावजी महाराज ने लेकर सभी संत-महात्माओं ने देशभक्ति व लोकतंत्र का पाठ पढ़ाया है। देश हमारे लिए सर्वोपरि है। देश रहेगा तो दैव रहेगा। इसलिए हम सभी का फर्ज है कि देश की रक्षा के लिए सभी लोग मिलजुलकर आगे आएं। शोक व दुःख की इस वेदना की घड़ी में हम भी महान संतों के चरण चिह्नों पर चलते हुए तन-मन और धन से शहीदों के परिवारों के साथ हैं। उन्होंने सभी भक्तों से कहा है कि वे मेले के दौरान सभी प्रकार की रस्मों में पूरी-पूरी सादगी अपनाएं।

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